{"_id":"1cb0536f80a3a24b2ddd7b2e0f9ef187","slug":"facts-about-metabolism","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपने मेटाबॉलिज्म से जुड़े ये पहलू जानते हैं आप?","category":{"title":"Healthy Food ","title_hn":"हेल्दी फूड","slug":"healthy-food"}}
अपने मेटाबॉलिज्म से जुड़े ये पहलू जानते हैं आप?
कमल कश्यप
Updated Tue, 11 Feb 2014 01:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेटाबॉलिज्म या चयापचय हमारे शरीर की एक ऐसी प्रकिया का नाम है, जो भोजन को एनर्जी, एंजाइम अथ्ावा फैट में परिवर्तित कर देती है। मेटाबॉलिज्म का चक्र हमारे शरीर में निरंतर चलता रहता है, जिससे शरीर को ताकत मिलती है।
विज्ञापन
सरल शब्दों में कहें तो यह हमारे शरीर का एनर्जी प्रोवाइडर होता है और शरीर के सेल्स को बनने में मदद करता है। मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया हमारे शरीर में 24 घंटे चलती रहती है।
विज्ञापन
यदि यह प्रकिया रुक जाए तो शरीर की तमाम क्रियाएं भी ठहर सकती हैं। मेटाबॉलिज्म आमतौर पर दो प्रकार का होता है- 'हाई मेटाबॉलिज्म' और 'स्लो मेटाबॉलिज्म'। मेटाबॉलिज्म के दोनों प्रकार हमारी सेहत को प्रभावित करते हैं। इसलिए इसका संतुलित होना जरूरी है।
विज्ञापन
स्लो मेटाबॉलिज्म
अगर शरीर में मेटाबॉलिज्म की प्रकिया धीमी हो जाती है, तो शरीर सुस्त हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति डिप्रेशन में भी आ सकता है। ठंड या गर्मी ज्यादा लगने लगती है और ब्लड प्रेशर भी कम हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मेटाबॉलिज्म कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें हाइपोथेडिज्म, कुपोषण, असंतुलित भोजन, व्यायाम न करना और एंट्री डिप्रेशन दवाओं का इस्तेमाल प्रमुख हैं। ऐसे में ट्यूमर, ब्रेन टयूमर, एडलीन (शरीर में पानी का भर जाना) और दिल संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
हाई मेटाबॉलिज्म
मेटाबॉलिज्म ज्यादा होने पर शरीर गर्म रहने लगता है और दिल की धड़कनें भी तेज होने लगती हैं। ऐसी परिस्थिति में भूख ज्यादा लगती है और बुखार के लक्षण भी उभर सकते हैं।
हाई मेटाबॉलिज्म के कारणों की बात करें, तो इसमें ब्रेन हार्मोन एवं थायराइड हार्मोन का बढ़ना, दवाओं का असर, किडनी की ग्लेंड्स का बढ़ना जिम्मेदार हो सकता है।
कई मामलों में अनुवांशिक कारण भी हाई मेटाबॉलिज्म का कारण हो सकते हैं। हाई मेटाबॉलिज्म से भी ब्रेन टयूमर, हाइपरथाइराडिज्म और किडनी संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
खानपान का रखें ध्यान
मेटाबॉलिज्म काफी हद तक हमारे खानपान और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करता है। गलत खानपान या फिर लंबे समय तक कुछ भी न खाने से इसकी समस्या हो सकती है। खाने की सभी खराब आदतें जैसे असमय खाना, खाने से जी चुराना आदि आपके मेटाबॉलिज्म को गड़बड़ कर सकता है।
खाली पेट आपके शरीर को सुप्तावस्था में पहुंचा सकता है और जब आप फिर से खाना खाते हैं तो वह उसे संग्रहीत करना शुरू कर देता है। इससे मोटापा बढ़ने की समस्या बढ़ सकती है। अगर आपका मेटाबॉलिज्म तेज है, तो आपके लिए प्रोटीन शेक और प्रोटीनयुक्त भोजन वजन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
ऐसे में प्रोटीनयुक्त फिश, अंडा, अंकुरित चने, मोठ, चिकन, चावल, दूध या दूध से बनी चीजें, सोया मिल्क या पाउडर के साथ-साथ मछली, फलियां, मेवा, बींस, इत्यादि का सेवन सप्ताह में दो से तीन बार जरूर करें।
अगर आपका मेटाबॉलिज्म स्लो है, तो आपकी बॉडी में एनर्जी अपने आप कम हो जाएगी। आपको पता होना चाहिए कि आपके बेसल मेटाबॉलिक रेट यानी बीएमआर को निर्धारित करने के लिए कई फैक्टर्स मायने रखते हैं।
सामान्य रूप से आप दिन में तीन बार आहार ले सकते हैं। साथ ही इन आहारों के बीच में दो से तीन छोटे-छोटे अल्पाहार जोड़ दें। दिन की शुरूआत हेल्दी नाश्ते से करें, और उसके बाद हर दो से तीन घंटे में अलग-अलग तरह का आहार लें।