मोटापे का ऐसा 'फायदा' कभी सुना नहीं होगा आपने
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रिश्ते पर सबसे बड़ी और सबसे सटीक जांच करने वाली एक जांच के अनुसार ज़्यादा वज़न होने से डिमेन्शिया का ख़तरा कम होता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान स्वास्थ्य सलाह के विपरीत, इस नए नतीजे से वे हैरान हैं।
लांसेट डयबीटीज़ एंड एंडोक्राइनोलोजी के इस शोध में तक़रीबन बीस लाख ब्रितानी लोगों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि कम वज़न वाले लोगों को डिमेन्शिया का ख़तरा सबसे ज़्यादा है।
डिमेन्शिया पर काम करने वाली संस्थाएं अभी भी धूम्रपान नहीं करने की, व्यायाम करने की और संतुलित आहार की सलाह देते हैं।
आधुनिक स्वास्थ्य संबंधी के मुद्दों में डिमेन्शिया बेहद अहम समस्या है। साल 2050 तक इससे ग्रसित रोगियों की संख्या तिगुना बढ़ कर 13।5 करोड़ होने की आशंका है।
इसका न तो कोई इलाज है ना ही कोई उपचार है। स्वस्थ्य जीवन शैली को बनाए रखना इससे बचने के लिए महत्वपूर्ण सलाह है। पर यह ग़लत भी हो सकता है।
यह 'आश्चर्यजनक' है
ऑक्सन एपीडेमियोलॉजी एंड द लंडन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड मेडीसिन के शोधदल ने पिछले दो दशकों के औसत 55 साल की उम्र वाले क़रीब 19 लाख लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड को स्टडी किया।
सबसे कम आंकने पर भी विश्लेषण में पाया गया स्वस्थ्य वज़न वाले लोगों की तुलना में कम वज़न वाले लोगों में डिमेन्शिया का ख़तरा 39 प्रतिशत अधिक था।
लेकिन अधिक वजन वाले लोगों में डिमेन्शिया का ख़तरा 18 प्रतिशत कम था, जबकि बेहद मोटे लोगों में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत पाया गया।
शोधदल के प्रमुख डॉ नवाब क्विज़िलबाश ने कहा "हाँ, यह आश्चर्य की बात है।"
उन्होंने बीबीसी समाचार वेबसाइट को बताया, "शोध में विवादास्पद बात यह है कि सामान्य, और स्वस्थ्य बॉडी मास इंडेक्स (शरीर का द्रव्यमान सूचकांक) वाले लोगों की तुलना में अधिक वज़न और मोटापे से ग्रस्त लोगों में डिमेन्शिया का ख़तरा कम है।"
"यह सारे नहीं तो पिछले कई अध्ययनों के विपरीत है। अगर आप एक साथ उन सब अध्ययनों को इकट्ठा करेंगे तो पाएंगे देखेंगे कि आकार सटीक नतीजों के मामले में हमारा अध्ययन इन सबको मात देता है।"
निश्चिंत ना रहें क्योंकि...
शोध में सुरक्षात्मक प्रभाव की कोई वजह नहीं मिलती। इस बात की कुछ जानकारी है कि विटामिन डी और कई की कमी डिमेन्शिया होने की संभावना को बढ़ा देता है पर यह उनमें कम हो सकता है जो अधिक खाना खाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मार्च 2015 में पहली मंत्री स्तरीय बैठक की जिसमें डिमेन्शिया के ख़िलाफ़ वैश्विक मुहीम की अपील की
पर डॉ क्विज़िलबाश चेतावनी देते हैं कि यह शोध वज़न बढ़ने देने का तर्क नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा "आप यह नहीं मान सकते कि मोटा होना या अधिक वज़न होना सही है। हो सकता है इसके सुरक्षात्मक प्रभावों पर शायद यह पाने के लिए आप उतना लंबा ना जिएं।"
दिल की बीमारी, दिल का दौरा, मधुमेह, कुछ तरह के कैंसर और कई अन्य बीमारियों मोटापे से जुड़ी हैं।