बेबिंका केक: गोवा की मिठाइयों की रानी, केक कम पुडिंग ज्यादा, वह भी सात परत वाला
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गोवा आए, तो पुर्तगाली शासकों के महलनुमा घरों को देखते या फिर तटों पर जिंदगी के इंद्रधनुष को निहारते वक्त गुजार दिया? यहां स्वाद की गलियों से भी गुजरकर देखते ! उधर समंदर की लहरें उठती हैं, इधर यहां सात परतों में स्वाद का मौसम उमड़ता है।
गोवा जिन चीजों के लिए मशहूर है, वे हैं खूबसूरत समुद्रतट, पुराने पुर्तगाली शासकों के महलनुमा घर, समु्द्री झींगा और मछलियों के व्यंजन तथा काजू या नारियल से बनाई जाने वाली फैनी। गोवा का खानपान उससे लगे पड़ोसी राज्यों से थोड़ा अलग है और इसकी वजह है, चार सौ साल लंबे पुर्तगाली उपनिवेशवादी संस्कृति की। विंडालू, सोरपोटेल जैसे व्यंजन कहीं और नहीं चखने को मिलते। चिकन जाकूती हो या प्रौन बालचाओ इनके बारे में भी यही कहा जा सकता है, मगर जिस चीज की ख्याति इनसे कम नहीं, वह ‘बेबिंका केक’ है। बेबिंका को गोवा की मिठाइयों की रानी कहा जाता है।
वास्तव में, यह केक कम पुडिंग ज्यादा है, वह भी सात परत वाला। (केक सेका जाता है और पुडिंग भाप से पकाया जाता है।) बेबिंका एक पारंपरिक भारतीय-पुर्तगाली मिठाई के रूप में गोवा में खूब चाव से खाई जाती है। इसकी हर परत अलग-अलग पकाई जाती है और इस काम में करीब चार घंटे लग जाते हैं। हर परत का रंग अलग नजर आता है (बहुरंगी बर्फी की मानिंद) और कोमलता का कलेवर में भी फर्क होता है। हल्की जली शक्कर वाली परत पेड़े या उत्तराखंड की बाल मिठाई की याद अनायास दिलाती है। यह परत ठोस होती है, पर मजा कैरेमल कस्टर्ड का महसूस होता है। सात परतों वाली इस जादुई मिठाई की एक खास बात यह भी है कि अगर तुरंत इसे खाने के लिए आपका मन न ललचाए, तो आप इसे फ्रिज में रख सकते हैं। यह कई दिन तक रखा जा सकता है और खराब नहीं होता।
बेबिंका की सात परतों में मैदे, घी, चीनी, अंडे की जर्दी तथा नारियल के गाढ़े दूध वाली परतें जुबान पर सबसे पहले अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। इसमें वैनीला की महक भी बड़ी दिलकश होती है। कुछ नुस्खों के अनुसार, इसमें कसे जायफल का पुट भी जरूरी है। क्रिसमस के मौके पर गोवा के लोग इसे बड़े शौक से बनाते और खाते रहे हैं और रिश्तेदारों एवं मित्रों को खिलाते हैं। वैसे इसे घर पर बनाने का चलन कम होता जा रहा है।
बेबिंका तैयार करने की विधि बहुत सरल हैै, पर हल्का, मध्यम मिठास वाल सुवासित बेबिंका बनाने के लिए खासे कौशल और धैर्य की जरूरत होती है। इसलिए बेकरी का सामान बेचने वाली कुछ खास दुकानों के उत्पाद की स्थानीय खपत भी है और निर्यात का बाजार भी उन्हीं के कब्जे में है। वैसे कहने को बेबिंका मकाउ तथा ब्राजील और अफ्रीका में भी बनाया जाता है, पर ऐसा नफीस नहीं। पुर्तगाल में बेबिंका बनाने की परंपरा नहीं थी।
दूसरे क्रियोल (मिश्रित नस्ल वाले) भोजन की तरह यह भारत में ही ईजाद किया गया और यहीं से सुदूर पूर्व तथा पश्चिम की तरफ फैला। यों केरल में भी अंडे की जर्दी से ‘मुत्तमाला’ नामक नाजुक और नफीस मिठाई बनाई जाती है, पर वह इतनी ‘जटिल’ नहीं। बहरहाल, एक जनश्रुति के अनुसार, बिबिओन नामक एक ईसाई नन ने इसका आविष्कार किया था और इसकी सात परतें पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन की सात पहाड़ियों का प्रतीक थीं। मेहमान को हो सकता है आकार छोटा लगा, इसलिए बाद में इसमें और परतें जोड़ी जाने लगीं। एक दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में प्रशांत महासागर क्षेत्र मैं उमड़ने वाले एक नहीं तीन-तीन समुद्री तूफानों को बेबिंका नाम दिया गया था। या तो वह मौसम विज्ञानी बेबिंका का चाहने वाला था या फिर ऐसा पुर्तगाली, जिसे अपने औपनिवेशिक साम्राज्य की यादें बेकरार करती रहती थीं।