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औषधीय गुणों से भरपूर है हल्दी, शरीर से इन दोषों को करती है दूर

Wed, 15 Jul 2020 12:31 PM IST
सोनू शर्मा बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 15 Jul 2020 12:31 PM IST
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Turmeric with medicinal properties removes these defects of the body
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कुछ साल पहले लंदन की एक कॉफी दुकान में जब मैंने पहली बार हल्दी दूध को देखा तो मुझे भरोसा नहीं हुआ। मेन्यू में इसे 'गोल्डन मिल्क' नाम दिया गया था। इसमें बादाम, थोड़ी दालचीनी और काली मिर्च के साथ मिठास के लिए प्राकृतिक एगेव सिरप डाली गई थी। उसके आगे मैंने पढ़ना बंद कर दिया। इसकी एक वजह शायद यह थी कि मैंने उसकी महंगी कीमत देख ली थी। दूसरी वजह, मुझे भारत की हजारों दादी मां की मुस्कान याद आ गई थी। 



थोड़ी देर के लिए मैं बचपन की यादों में खो गई जब मेरी मां मुझे गर्म हल्दी दूध पिलाने के लिए दुलारती थी। मना करने पर डांट भी पड़ती थी। उस दूध में मेवे नहीं होते थे। मीठा बनाने के लिए बस चीनी मिली होती थी। आखिरी घूंट में मुंह में हल्दी भर जाती थी। हिंदी में जिसे हल्दी दूध कहा जाता है उसे मेरी मां तमिल में पलील मंजल कहती थी। 

Turmeric with medicinal properties removes these defects of the body
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मसाला या औषधि?

गले में खराश हो या शरीर में बुखार हो, मां तुरंत ही हल्दी दूध पिला देती थी। कई भारतीय इसे तरल रामबाण औषधि मानते हैं। पश्चिमी देशों ने पिछले दशक में ही हल्दी को खोजा और इसे 'सुपरफूड' बनाने में देर नहीं की। उन्होंने हल्दी की ताजी गांठों को चाय और कॉफी में मिला दिया। उसका शरबत बनाने लगे और तुरंत फायदे के लिए हल्दी का गाढ़ा पेय तैयार कर दिया। लंदन के बाद सैन फ्रांसिस्को से लेकर मेलबर्न तक सभी शहरों के कैफे और कॉफी दुकानों में मैंने हल्दी वाले पेय देखे हैं। 

भारत में हल्दी लंबे समय से रसोई की प्रमुख सामग्रियों में से एक है। यह दो रूपों में इस्तेमाल होती है- गांठों के रूप में और अब हल्दी पाउडर के रूप में भी। मेरी मसालदानी में सरसों, जीरा और मिर्च पाउडर के साथ हमेशा हल्दी पाउडर मिलता है। मेरी मां भी ऐसे ही मसाले रखती थी और उनसे पहले उनकी मां का भी यही तरीका था। 

Turmeric with medicinal properties removes these defects of the body
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पारंपरिक भारतीय रसोई में हल्दी खाने में रंग लाने के लिए इस्तेमाल होती है, खास तौर पर करी और शोरबा बनाने में। हल्दी की ताजी और मुलायम गांठों से हल्दी का अचार भी बनता है, जिसके ऊपर गर्म तेल से छौंक लगाई जाती है। कुछ समुदायों में हल्दी के पत्तों का लिफाफा बनाकर उसमें भोजन पकाया जाता है। 'द फ्लेवर ऑफ स्पाइस' की लेखिका मरियम रेशी कहती हैं, 'गोवा में मैं अपने घर में हल्दी उगाती हूं ताकि यहां की मशहूर पटोलिओ मिठाई बना सकूं।' 

पटोलियो बनाने के लिए दरदरे चावल में गुड़ मिलाकर उसे हल्दी के दो पत्तों के बीच रखा जाता है। इसके बाद उसे भाप लगाकर पकाया जाता है जिससे उसमें हल्दी की खास खुशबू आ जाती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हल्दी कितनी जरूरी?

क्या नए भारतीय व्यंजनों में भी हल्दी की उतनी ही अहमियत है जितना पांरपरिक खाने में है? यह जानने के लिए मैंने मुंबई के मशहूर द बॉम्बे कैंटीन रेस्तरां के एक्जीक्यूटिव शेफ थॉमस जाचरियास से बात की। जाचरियास अपने रेस्तरां में सिर्फ ताजी और स्थानीय सामग्रियों का ही इस्तेमाल करते हैं। वह हल्दी को 'कम जायके वाली पृष्ठभूमि सामग्री' कहते हैं। 'मुझे लगता है कि भारत में ज्यादातर लोग इसे आदत के कारण इस्तेमाल करते हैं, न कि खाने में कोई जायका बढ़ाने के लिए।' 

जाचरियास को जब भी मौका मिलता है वह ताजी हल्दी को स्टार सामग्री की तरह इस्तेमाल करते हैं, जैसे केरल की फिश करी मीन मोइली बनाने के लिए। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हल्दी और अदरक एक ही परिवार के हैं। भारत के कई राज्यों में इसकी खेती होती है। फाइनेंसियल एक्सप्रेस के मुताबिक, दुनियाभर के कुल हल्दी उत्पादन का 75 फीसदी से अधिक हिस्सा भारत में होता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा हल्दी निर्यातक है और यहां इसकी खपत भी सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत के गर्म और आर्द्र मौसम वाले राज्यों- आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में उम्दा क्वालिटी वाली हल्दी का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसे मई से अगस्त के बीच लगाया जाता है और जनवरी आते-आते फसल तैयार होने लगती है। 

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