कोरोना वायरस ने पहले से ही दुनियाभर के लोगों को परेशान कर रखा है। इसके सबसे ज्यादा केस तो अमेरिका में ही हैं। वहां कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 50 लाख के पार हो चुकी है जबकि 1.61 लाख से ज्यादा लोग इसकी वजह से मारे जा चुके हैं। अब अमेरिका में ही एक 'नई बीमारी' ने दस्तक दे दी है। यह 'नई बीमारी' अमेरिका के 34 राज्यों तक फैल चुकी है, जहां 400 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित होकर बीमार पड़ चुके हैं। अमेरिका की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। आइए जानते हैं इस 'नई बीमारी' के बारे में, यह कितनी खतरनाक है और क्या कोरोना वायरस से इसका कोई संबंध है।
अमेरिका में तेजी से फैल रही 'नई बीमारी' क्या है? 400 से ज्यादा लोग हो चुके हैं संक्रमित, जानिए इसके लक्षण और उपाय
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह 'नई बीमारी' लाल और पीले प्याज से फैल रही है। इस वजह से सीडीसी ने लोगों को प्याज खाने को लेकर एहतियात बरतने और सतर्क रहने की चेतावनी दी है। यह 'नई बीमारी' सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि कनाडा में भी फैल रही है। वहां इसकी वजह से 50 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।
दरअसल, यह 'नई बीमारी' सैल्मोनेला बैक्टीरिया के संक्रमण से फैल रही है। असल में सैल्मोनेला बैक्टीरिया के एक समूह का नाम है। अमेरिका में यह खाद्य जनित बीमारी का एक आम कारण है। यह बैक्टीरिया कच्चे मांस, बीफ, अंडे और कभी-कभी बिना धोए गए फलों और सब्जियों पर भी पाया जाता है। इस बीमारी का कोरोना वायरस से कोई संबंध अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
सीडीसी के मुताबिक, इस बैक्टीरिया की खोज वर्ष 1885 में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने की थी, जिसका नाम डॉ. डेनियल एल्मर सैल्मोन था। उन्होंने ही इस बैक्टीरिया को अपना नाम दिया था। 23 जुलाई, 1850 को जन्मे डॉ. सैल्मोन एक पशु रोग विशेषज्ञ थे। 30 अगस्त, 1914 को उनकी मौत हो गई थी।
संक्रमण के लक्षण क्या हैं?
- सैल्मोनेला संक्रमण वाले अधिकांश लोगों को दस्त, बुखार और पेट में ऐंठन होती है।
- लक्षण आमतौर पर संक्रमण के छह घंटे से छह दिन बाद और चार से सात दिनों के बीच दिखने शुरू होते हैं।
- कुछ लोगों में संक्रमण के बाद कई हफ्तों तक लक्षण दिखते ही नहीं हैं जबकि कुछ लोग कई हफ्तों तक लक्षणों का अनुभव करते हैं।
- सैल्मोनेला संक्रमण के तनाव कभी-कभी मूत्र, रक्त, हड्डियों, जोड़ों या तंत्रिका तंत्र (रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क) में संक्रमण का कारण भी बन सकते हैं और गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं।