Mothers Day 2025: महिलाएं जरूर कराएं ये पांच हेल्थ चेकअप, ताकि समय रहते गंभीर बीमारियों का चल जाए पता
Mothers Day 2025: समय पर सही जांच व इलाज के प्रति महिलाओं को जागरूक किया जाना चाहिए। जरूरी है कि समय-समय पर महिलाएं अपना हेल्थ चेकअप कराएं। महिला रोग विशेषज्ञ, कुछ स्वास्थ्य जांच को हर महिला के लिए जरूरी मानती हैं।
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Mothers Day 2025 : महिलाएं परिवार और समाज की रीढ़ होती हैं। उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत न केवल उनका बल्कि पूरे परिवार का आधार है। इसके बावजूद कई बार महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। हर महिला जो मां है या भविष्य में भावी मां बनेंगी, उन्हें अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। महिलाएं कई ऐसी बीमारियों से ग्रस्त हो जाती हैं, जिनका समय रहते पता चल जाता तो रोग से बचाव संभव था। 11 मई को मदर्स डे मनाया जा रहा है। इस मौके पर हर महिला को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। इसके लिए समय पर सही जांच व इलाज के प्रति महिलाओं को जागरूक किया जाना चाहिए। जरूरी है कि समय-समय पर महिलाएं अपना हेल्थ चेकअप कराएं। महिला रोग विशेषज्ञ, कुछ स्वास्थ्य जांच को हर महिला के लिए जरूरी मानती हैं।
हर महिला को करानी चाहिए ये पांच टेस्ट
अमर उजाला से हुई बातचीत में गुरुग्राम स्थित एक निजी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल प्रकाश में बताया, महिलाओं को सर्वाइकल स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर करना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण जांच है जिसमें गर्भाशय में कैंसर को रोकने या समय पर कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है। सर्वाइकल स्क्रीनिंग HPV संक्रमण (Human Papillomavirus) का पता लगाती है जो कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। हर महिला को सर्वाइकल स्क्रीनिंग 25 वर्ष का आयु के बाद करानी चाहिए। सर्वाइकल स्क्रीनिंग में Pap Smear टेस्ट हर तीन साल में और एचपीवी के साथ हर पांच साल में जांच कराई जा सकती है। यह जांच सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने की कराई जाती है।
सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन
यह स्तनों की जांच है जो स्तन कैंसर या अन्य असामान्यताओं का पता लगाने के लिए की जाती है। इसमें दो प्रकार होते हैं स्तन स्व-परीक्षण और क्लिनिकल ब्रेस्ट परीक्षण। महिलाओं को 25 वर्ष की आयु के बाद हर माह मासिक धर्म खत्म होने के सात से 10 दिन के बाद स्वत: स्तन जांच कर सकते हैं। इसकी जांच ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान और गांठ आदि पर नजर रखने के लिए की जाती है।
सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) स्क्रीनिंग
यौन संचारित संक्रमण (STI) एक ऐसा संक्रमण है जो यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह बैक्टीरिया, वायरस के कारण हो सकता है। इस जांच से HIV/AIDS, हेपेटाइटिस, एचपीवी, सिफलिस, गोनोरिया, क्लैमाइडिया जैसी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। महिलाओं को यौन जीवन शुरू होने के बाद और जोखिम वाली परिस्थिति में जैसे असुरक्षित संबंध की स्थिति में यह जांच करानी चाहिए। एसटीआई स्क्रीनिंग डॉक्टर की सलाह पर या जोखिम के अनुसार कराएं।
हीमोग्लोबिन की जांच
डाॅ.पारुल प्रकाश के मुताबिक, महिलाओं में हीमोग्लोबिन 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक होना चाहिए। हीमोग्लोबिन लाल रंग कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जो शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचाता है। कम हीमोग्लोबिन एनीमिया का संकेत हो सकता है। इसके कारण एनीमिया की कमी, विटामिन बी 12 या फोलिक एसिड की कमी हो सकती है। हीमोग्लोबिन की जांच किसी भी उम्र में कराई जा सकती है, खासकर कमजोरी, सांस फूलने, पीरियड में ज्यादा खून बहने पर जरूर जांच कराएं। साल में एक बार या डॉक्टर के कहने पर सीबीसी जांच करानी चाहिए।
कैल्शियम एंड विटामिन डी
महिलाओं को थकान या कमजोरी के लक्षण नजर आने पर विटामिन डी जरूर टेस्ट करा लेना चाहिए। इसकी जांच डॉक्टर की सलाह से किसी भी उम्र की महिला करा सकती हैं। हड्डियों या नर्व की समस्या और विटामिन की कमी का पता लगाने के लिए विटामिन डी की जांच कराई जाती है। साथ ही महिलाओं के लिए जरूरी है कि वह 40-45 साल की उम्र के बाद, खासकर मेनोपॉज के आसपास कैल्शियम स्तर की जांच भी कराएं। कैल्शियम टेस्ट साल में एक बार या डॉक्टर की सलाह पर करा सकते हैं। इससे हड्डियों की मजबूती, ऑस्टियोपोरोसिस, थायराइड डिसऑर्डर का पता चलता है।
उम्र बढ़ने के साथ अधिकतर महिलाओं को थायराइड, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और नेत्र संबंधी समस्याएं जैसे मोतियाबिंद व आंखों की कमजोरी जैसी बीमारी हो सकती है। इन बीमारियों का समय रहते पता लगाने के लिए समय रहते जांच कराई जा सकती है।
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