फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   mit researchers made a reusable mask by using silicon and can use for 20 times

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने बनाया सिलिकॉन आई-मास्क, 20 बार होगा यूज और संक्रमण का खतरा कम

Thu, 12 Nov 2020 03:03 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Thu, 12 Nov 2020 03:03 PM IST
विज्ञापन
mit researchers made a reusable mask by using silicon and can use for 20 times
सिलिकॉन मास्क - फोटो : social media

कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहे फ्रंटलाइन चिकित्साकर्मी, डॉक्टर, नर्स और पुलिसकर्मियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले मेडिकल स्टाफ, डॉक्टर और नर्स मास्क, ग्लव्ज और पीपीई किट की कमी की वजह से किसी ना किसी तरीके से इसे दोबारा पहनने के रास्ते ढूंढ रहे थे।

विज्ञापन


स्टाफ की इन परेशानियों को देखते हुए कुछ वैज्ञानिकों ने ऐसे उत्पाद विकसित किए जिन्हें पर्सनल हाइजीन और पीपीई किट के रूप में बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका की मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ने कोरोना वायरस से बचने के लिए एक मास्क बनाया है, इसकी खास बात यह है कि सिलिकॉन से बना है।
विज्ञापन


शोधकर्ताओं का कहना है कि इसे बार-बार उपयोग में लाया जा सकता है। हालांकि शोधकर्ता अभी भी इस बात की पुष्टि करने में लगे हैं कि इस मास्क के इस्तेमाल से वायरस या हानिकारक कणों को प्रभावी रूप से कितना रोक पाता है। लेकिन एक बात साफ है कि इस मास्क को 20 बार उपयोग किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने इसका नाम आई-मास्क (iMASC) रखा है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

सिलिकॉन रबर और 3डी प्रिंटर से बना

इस मास्क को बनाने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि आई-मास्क, एन95 मास्क की तरह ही कोरोना वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है। यह बारीक हानिकारक कणों को शरीर में प्रवेश करने से रोकने के लिए एन95 मास्क के फिल्टर का ही इस्तेमाल करता है। मास्क को बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने 3डी प्रिंटर का इस्तेमाल किया है।

इस मास्क को एक विशेष सिलिकॉन रबर की मदद से बनाया गया है ताकि इसे बार-बार इस्तेमाल में लाया जा सके। शोधकर्ताओं का कहना है कि मुंह को कवर करने वाले डबल फिल्टर को हर इस्तेमाल के बाद बदला जा सकता है। शोधकर्तांओं ने इस तरह के दोबारा उपयोग में लाए जाने वाले मास्क को इसलिए बनाया क्योंकि बाजार में पीपीई किट और मास्क की भारी कमी हो जाती है।

हाइड्रोडन पेरोक्साइड के उपयोग से किया विकसित

एन-95 मास्क में उपयोग होने वाले फिल्टरिंग कपड़ा बनाने वाले पीटर त्साई और ड्यूक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओँ ने हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल कर खुद के फिल्टर तकनीक को विकसित किया है। इस नई फिल्टर तकनीक को आई-मास्क में इस्तेमाल किया गया है।

उन्होंने ऑटोक्लेव, स्टीम स्टेरलाइजर, ओवन में रखना, ब्लीज और आइसोप्रोपिल अल्कोहल में भिगोना जैसे तरीकों को शामिल किया है। हर परीक्षण के बाद मास्क में इस्तेमाल की गई सिलिकॉन सामग्री दोबारा इस्तेमाल करने लायक बन गई और संक्रमण का खतरा कम रहा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed