अध्ययन में दावा: महिलाओं में अल्जाइमर रोग का खतरा अधिक, ऐसे जोखिम कारकों से करें बचाव
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उम्र बढ़ने के साथ कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अल्जाइमर रोग उन्हीं में से एक है, एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में 62 लाख से अधिक लोग इस समस्या के शिकार हैं। इसका जोखिम भारत में भी बढ़ता हुआ देखा गया है। अल्जाइमर रोग में मस्तिष्क सिकुड़ने लगता है (एट्रोफी) जिसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं मर सकती हैं।
अल्जाइमर रोग को डेमेंशिया का सबसे आम कारण माना जाता है जिसमें सोच, व्यवहार और दैनिक कार्यों को करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 65 से अधिक उम्र के लोगों में अल्जाइमर रोग का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है, पर हालिया अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसका जोखिम अधिक हो सकता है।
हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की है कि महिलाएं इस विकार के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों हैं? शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर कम उम्र से ही इसके जोखिम कारकों से बचाव शुरू कर दिया जाए तो रोग के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने महिलाओं में अल्जाइमर के खतरे के कारणों के बारे में समझने की कोशिश की। इसके लिए उन महिलाओं पर अध्ययन किया गया जिनकी मृत्यु इस रोग के कारण हुई थी। इन महिलाओं के मस्तिष्क में रासायनिक रूप से संशोधित इंफ्लामेटरी प्रोटीन C3 का स्तर काफी अधिक पाया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि चूंकि रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी कम होने लगता है, जबकि यह हार्मोन सामान्य रूप से C3 प्रोटीन के खिलाफ सुरक्षात्मक हो सकता है। संभवत: रजोनिवृत्ति के बाद अल्जाइमर का खतरा बढ़ने का यह भी एक कारण हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
कैलिफोर्निया स्थित स्क्रिप्स रिसर्च में मॉलिक्यूलर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक स्टुअर्ट लिप्टन कहते हैं, हमारे अध्ययन से पता चलता है कि महिलाओं में कुछ प्रकार के कैमिकल मोडिफिकेशन देखे जाते रहे हैं जो अल्जाइमर जैसे रोगों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। अध्ययन के परिणामों के आधार पर इस समस्या के जोखिमों को कम करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं।
इसके अलावा दैनिक जीवन के कारकों पर भी सभी लोगों को ध्यान देते रहने की आवश्यकता है जिससे इस न्यूरोलॉजिकल समस्या के खतरे को कम किया जा सके।
अल्जाइमर के जोखिम कारकों के बारे में जानिए
डॉक्टर्स बताते हैं कुछ स्थितियां आपमें अल्जाइमर रोग के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसके बारे में जानकारी होते हुए बचाव के उपायों का पालन करते रहना जरूरी होता है। धूम्रपान- शराब का सेवन, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा जैसी स्थितियां अल्जाइमर रोग के जोखिम को बढ़ाती हैं। इसके अलावा यदि आपके परिवार में पहले से ही किसी को अल्जाइमर की समस्या रह चुकी है तो भी इसका जोखिम अधिक देखा गया है।
अल्जाइमर से बचाव के लिए क्या करें?
अध्ययनों से पता चलता है कि वैसे तो अल्जाइमर रोग से बचाव नहीं किया जा सकता है, हालांकि जीवनशैली में सुधार करके जोखिम कारकों को जरूर कम कर सकते हैं। आहार, व्यायाम और मादक पदार्थों से दूरी बनाने से न्यूरोलॉजिकल विकारों का जोखिम कम होता है। दिनचर्या में नियमित रूप से योग-व्यायाम को शामिल करने से अल्जाइमर रोग के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Mechanistic insight into female predominance in Alzheimer’s disease based on aberrant protein S-nitrosylation of C3
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।