फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना के इलाज में उम्मीद दिखाने वाली 'सेप्सिवैक' दवा के बारे में जानें सबकुछ

Sun, 26 Apr 2020 01:45 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Sun, 26 Apr 2020 01:45 PM IST
विज्ञापन
Know all you need to know about Sepsivac drug for coronavirus treatment clinical trial approved by DGCI MJA
क्या कोरोना के इलाज में संजीवनी साबित होगी सेप्सिवैक? - फोटो : Pexels

कोरोना वायरस के कारण फैली महामारी पर नियंत्रण के लिए भारत समेत दुनियाभर के कई देशों में वैक्सीन और दवा बनाने की कोशिश जारी है। पिछले महीने भारत की अग्रणी दवा कंपनी सिप्ला ने दावा किया कि वह छह महीने के अंदर कोरोना की दवा बना लेगी। अबतक एचआईवी की दो दवाओं के अलावा और मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के भी कोरोना के इलाज में सकारात्मक असर होने की बात कही गई। हालांकि वैज्ञानिक तौर पर ऐसा प्रमाण नहीं है। अब, कोरोना के इलाज में एक नई दवा ने उम्मीद दिखाई है। इस दवा का नाम है सेप्सिवैक (Sepsivac), जिसके क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी मिल गई है।

Know all you need to know about Sepsivac drug for coronavirus treatment clinical trial approved by DGCI MJA
क्लिनिकल ट्रायल (सांकेतिक तस्वीर)

सेप्सिवैक दवा का निर्माण कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने किया है। ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया (DCGI) ने इसके क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दे दी है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के सहयोग से तीन अस्पतालों में कोरोना के मरीजों पर ट्रायल किया जाएगा। इसके लिए देश के जिन अस्पतालों का चयन किया गया है, उनमें उनमें पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के अलावा एम्स दिल्ली और भोपाल शामिल है। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉक्टर शेखर सी. मंडे के मुताबिक तीन अस्पतालों में से एक को ट्रायल के लिए एथिक्स कमेटी से भी अनुमति मिल गई है। बाकी दोनों अस्पतालों को अनुमति मिलते ही ट्रायल शुरू करवाया जाएगा। 

Know all you need to know about Sepsivac drug for coronavirus treatment clinical trial approved by DGCI MJA
दवाएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दरअसल, सेप्सिवैक दवा का इस्तेमाल जिस बीमारी में किया जाता है, उसके लक्षण कोविड 19 से मिलते हैं। यह दवा सीएसआईआर की ‘न्यू मिलेनियम इंडियन टेक्नोलॉजी’ पहल के तहत एक प्रोजेक्ट का फलाफल है। सीएसआईआर के सहयोग से कैडिला फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित इस दवा का इस्तेमाल एंटी ग्राम सेप्सिस में किया जाता है। सांस लेने में तकलीफ और फेफेड़ों में दर्द वाली ग्राम-नेगेटिव सेप्सिस बीमारी कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होती है। इस बीमारी के इलाज में यह दवा इसके इलाज में कारगर पाई गई है। यह दवा इम्यून सिस्टम को बूस्ट करती है। इन्ही कारणों से कोविड-19 के इलाज के लिए इसका ट्रायल किया जा रहा है। इस दवा को पहले से ही सेप्सिस और सेप्टिक शॉक में इम्यूनोथेरेपी के इलाज के लिए ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से अनुमति मिली हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Know all you need to know about Sepsivac drug for coronavirus treatment clinical trial approved by DGCI MJA
हमारे फेफड़ों पर होता है संक्रमण (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दरअसल, सेप्सिस एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होती है, जिसमें हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली अत्यधिक सक्रिय हो जाती है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक शरीर के किसी हिस्से में खरोंच लगने, कटने या कीड़े काटने से होने वाले संक्रमण के जरिए भी यह बीमारी हो सकती है। शरीर में तेजी से संक्रमण फैलने पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तेज गति से काम करना शुरू कर देती है और फिर वायरस के साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर भी हमला करना शुरू कर देती है। इसकी वजह से शरीर में किडनी, लीवर जैसे अंग काम करना बंद कर देते हैं। गंभीर स्थिति होने पर मौत होने की भी संभावना होती है। इस बीमारी में सेप्सिवैक दवा बहुत राहत पहुंचाती है।

विज्ञापन
Know all you need to know about Sepsivac drug for coronavirus treatment clinical trial approved by DGCI MJA
दवा का ट्रायल कोरोना तीन तरह के मरीजों पर किया जाएगा

सेप्सिवैक में माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू होता है जो सेप्सिस के मरीजों में इम्यूनिटी यानी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सेप्सिवैक दवा सेप्सिस से होने वाली मृत्यु दर को 50 फीसदी से कम कर देता है। इसलिए कोविड 19 के लिए इसके क्लीनिकल ट्रायल पर विचार किया गया। दवा का ट्रायल कोरोना तीन तरह के मरीजों पर किया जाएगा। 

  • पहला ट्रायल कोविड-19 के वे मरीज, जो आईसीयू में हैं यानी जिनकी हालत ज्यादा गंभीर है।
  • दूसरा ट्रायल उन पर होगा जो आईसीयू में नहीं हैं और
  • तीसरा ट्रायल उन लोगों पर जो कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। यह इसलिए कि ठीक होने के बाद दोबारा इसका संक्रमण नहीं हो। 

कोरोना के इलाज में यह दवा कितनी कारगर होगी, यह ट्रायल के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन इस दवा ने इस संकट के दौर में एक उम्मीद जरूर दिखाई है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed