कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में अब तक छह लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। एक करोड़ 44 लाख से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। चीन के वुहान शहर से दिसंबर 2019 से शुरू हुआ कोरोना वायरस संक्रमण अब पूरी दुनिया में फैल चुका है, लेकिन इस वायरस की कोई प्रमाणिक वैक्सीन या दवा अब भी तैयार नहीं की जा सकी है।
Coronavirus vaccine: कोरोना वायरस की वो चार वैक्सीन, जिसने दुनियाभर में जगाई उम्मीद, जानें ताजा अपडेट्स
दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में सोमवार से ही यह ट्रायल शुरू हो जाएगा। यह ट्रायल 100 स्वस्थ लोगों पर किया जाएगा। जिन पर ट्रायल किया जाएगा उनकी उम्र 18 से 55 साल तक होगी। इस टेस्ट के लिए दिल्ली-एनसीआर के लोगों से वॉलेंटियर करने की अपील की गई थी। रजिस्ट्रेशन कराने वालों के लिए अपना कोरोना टेस्ट और लीवर टेस्ट कराना जरूरी था।
इस वैक्सीन की दो डोज दी जाएंगी। पहली डोज के दो सप्ताह के बाद दूसरी डोज दी जाएगी। ये वैक्सीन इंजेक्शन के जरिए दिया जाएगा। भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड और जायडस कैडिला भारत में कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में आगे हैं। भारत बायोटैक इंटरनेशनल लिमिटेड की वैक्सीन का नाम कोवैक्सीन है।
इसके अलावा तकरीबन आधा दर्जन भारतीय कंपनियां कोविड-19 के वायरस के लिए वैक्सीन विकसित करने में जुटी हुई हैं। इन कंपनियों में से एक सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया है। वैक्सीन के डोज के उत्पादन और दुनियाभर में बिक्री के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी है।
ऑक्सफोर्ड है सबसे आगे
- यूरोप समेत दुनिया में कोरोना वैक्सीन का पहला ट्रायल ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड में शुरू हुआ था। अप्रैल महीने में ही यहां कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन के लिए इंसानों पर परीक्षण शुरू हो गया था। शुरुआती चरण के लिए यहां 800 लोगों को बतौर वॉलेंटियर चुना गया था। ये टीका ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम ने तैयार किया था। जेनर इंस्टीट्यूट में वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट इस टीम का नेतृत्व कर रही हैं। दावा है कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का पहला ह्यूमन ट्रायल कामयाब रहा है। अगर आगे भी सबकुछ ठीक रहता है, तो संभव है कि बहुत जल्दी ही कोरोना वायरस की एक कारगर वैक्सीन तैयार कर ली जाएगी।
अमेरिका भी ईजाद कर सकता है वैक्सीन
- अमेरिका में टेस्ट की गई पहली कोविड-19 वैक्सीन से लोगों के इम्यून को वैसा ही फायदा पहुंचा है, जैसा वैज्ञानिकों ने उम्मीद की थी। अब इस वैक्सीन का ट्रायल किया जाना है। नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ और मोडेरना इंक में डॉ. फाउची के सहकर्मियों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है। 27 जुलाई से इस वैक्सीन का 30 हजार लोगों पर परीक्षण किया जाएगा और पता किया जाएगा कि क्या ये वैक्सीन वाकई कोविड-19 से मानव शरीर को बचा सकती है।
इस बीच रूस पर वैक्सीन का फॉर्मूला चुराने का भी आरोप लगा। इन आरोपों को ब्रिटेन में रूस के राजदूत ने सिरे से खारिज कर दिया है। एंड्रेई केलिन ने कहा, 'मैं इस कहानी पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करता हूं। इस बात का कोई मतलब ही नहीं है।'
हालांकि विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने जोर देते हुए कहा है कि यह बहुत साफ है कि रूस ने ऐसा किया है। इससे पूर्व ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) ने कहा था कि रूस के हैकर्स उन संगठनों को निशाना बना रहे हैं, जो कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन के अलावा अमेरिका ने भी आरोप लगाया था कि रूस के हैकरों ने वैक्सीन से जुड़े रिसर्च को चोरी करने की कोशिश की है।