कोरोना टीकाकरण के मामले में दुनिया में सबसे आगे चल रहे इस्राइल ने अब मॉडर्ना कंपनी की वैक्सीन के इस्तेमाल की भी मंजूरी दे दी है। यह दूसरी वैक्सीन है, जिसे इस्राइल ने मंजूरी दी है। इससे पहले उसने फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को मंजूरी दी थी, जिसका इस्तेमाल टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है। अमेरिका और कनाडा के बाद के बाद मॉडर्ना की वैक्सीन को मंजूरी देने वाला इस्राइल दुनिया का तीसरा देश बन गया है। मॉडर्ना ने बताया कि इस्राइल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने उसकी वैक्सीन की 60 लाख खुराकें मांगी हैं, जिसकी पहली खेप इसी महीने मिलने की उम्मीद है।
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इस्राइल के स्वास्थ्य मंत्री यूली एडेल्स्टीन ने मंगलवार को बताया कि देश में लगभग 13 लाख 70 हजार लोग फाइजर वैक्सीन की दो में से पहली खुराक ले चुके हैं। सोमवार को लगभग एक लाख 46 हजार टीके लगाए गए थे, जबकि रविवार को एक लाख 34 हजार लोगों ने वैक्सीन की पहली खुराक ली थी।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हालांकि कोरोना की दूसरी खुराक लेने के बाद ही वायरस से पूरी सुरक्षा मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि इस बीच इस्राइल में कोरोना संक्रमण की दर बढ़ रही है, इस समय वायरस से निपटने के लिए एक पूर्ण और लघु लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प है। इस्रायल में अब तक चार लाख से अधिक कोरोना संक्रमण के मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
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वहीं, अमेरिका में टीकाकरण अभियान की शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन अब इसमें तेजी लाने के लिए जल्द ही यहां कोरोना के कम से कम 10 लाख टीके प्रतिदिन लगाए जाएंगे। अमेरिका में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथोनी फौसी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब भी अमेरिका में एक दिन में करीब पांच लाख टीके रोज लगाए जा रहे हैं।
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टीकाकरण के मामले में रूस की अगर बात करें तो यहां 10 लाख से अधिक लोगों को अब तक 'स्पूतनिक-वी' का टीका लगाया जा चुका है। गमलेया रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित इस वैक्सीन के बारे में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि यह कोरोना के खिलाफ कम से कम 95 फीसदी असरदार है।