दुनिया के कई देशों में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान चल रहे हैं और सभी देशों में वैक्सीन लगाने का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। इसके लिए प्राथमिकता वाले ग्रुप बनाए गए हैं, जिन्हें सबसे पहले वैक्सीन दी जा रही है। इस ग्रुप में हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और बुजुर्गों को रखा गया है, यानी ये वो लोग है, जिन्हें सबसे पहले टीका लगाया जा रहा है। भारत में भी यही तरीका अपनाया जाएगा, लेकिन आपको इसके उलट इंडोनेशिया का वैक्सीनेशन प्लान कुछ अलग ही है। यहां 13 जनवरी से टीकाकरण अभियान शुरू होगा, लेकिन यहां बुजुर्गों को नहीं, बल्कि सरकार ने सबसे पहले 18-59 वर्ष के लोगों को वैक्सीन देने का फैसला किया है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है...
इस देश में 13 जनवरी से शुरू होगा टीकाकरण, पर बुजुर्गों को पहले नहीं मिलेगी वैक्सीन, जानिए क्यों?
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दरअसल, इंडोनेशिया का मानना है कि 18-59 वर्ष के लोग कामकाजी लोग हैं, इसलिए उन्हें प्राथमिकता देने का फैसला किया है। फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सरकारी कर्मचारियों के बाद ही बुजुर्गों को वैक्सीन दी जाएगी। इसका उद्देश्य कोरोना वायरस के खिलाफ तेजी से हर्ड इम्यूनिटी विकसित करना और देश की अर्थव्यवस्था में जल्दी से सुधार लाना है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया की यह रणनीति बीमारी के प्रसार को धीमा कर सकती है, हालांकि यह मृत्यु दर को प्रभावित नहीं कर सकती है।
इंडोनेशिया में टीकाकरण अभियान में चीन की कंपनी सिनोवेक बायोटेक की वैक्सीन 'कोरोनावैक' का इस्तेमाल किया जाएगा। दरअसल, इस वैक्सीन के ट्रायल 18-59 साल के लोगों पर किए गए हैं, जबकि यह बुजुर्गों पर कितनी असरदार है, इसका कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। ये भी एक वजह है कि इंडोनेशिया ने बुजुर्गों को प्राथमिकता ग्रुप में नहीं रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीकाकरण अभियान के तहत सिनोवेक बायोटेक वैक्सीन की पहली खुराक इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो को दी जाएगी, यानी वो वैक्सीन लेने वाले इंडोनेशिया के पहले शख्स बनेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादी सादिकिन ने कहा कि देश को हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने के लिए 67 फीसदी लोगों का टीकाकरण करना होगा, यानी करीब 18.15 करोड़ लोगों का। इसके लिए वैक्सीन की 42.7 करोड़ खुराक की जरूरत होगी। यह हर व्यक्ति को दिए जाने वाले दो डोज से ज्यादा हैं, लेकिन इसमें वेस्टेज रेट को भी ध्यान में रखा गया है, यानी अगर कोई वैक्सीन खराब हो जाती है या उसके साथ कोई और समस्या आ जाती है तो।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशिया ने 'कोरोनावैक' की करीब 12 करोड़ खुराक के लिए डील की है, जिसमें से 30 लाख खुराक की पहली खेप इंडोनेशिया पहुंच भी गई है। इसके अलावा दूसरी तिमाही में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और तीसरी तिमाही में फाइजर की वैक्सीन यहां पहुंचेगी, जिनका इस्तेमाल बाद में टीकाकरण अभियान में किया जाएगा। इंडोनेशिया के लोगों के लिए खुशी की बात ये है कि पूरे देश में लोगों को मुफ्त में वैक्सीन दी जाएगी। हालांकि इस प्रक्रिया में 15 महीने का लंबा वक्त लग सकता है।