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'अल्कोहल अवेयरनेस मंथ'… क्या आप लत के करीब हैं?

Tue, 30 Apr 2019 10:06 PM IST
मोना नारंग डॉ. बिनिता प्रियंबदा, सीनियर कंसल्टेंट
डॉ. बिनिता प्रियंबदा, सीनियर कंसल्टेंट Published by: मोना नारंग Updated Tue, 30 Apr 2019 10:06 PM IST
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Alcohol Awareness Month: Know about dangers of drinking too much alcohol
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शराब पीना आधुनिक समाज का नया मानदंड है। यह न तो लिंग-विशिष्ट है और न ही यह अब चकित करता है। इसी वजह से 1987 में नेशनल काउंसिल ऑफ अल्कोहलिज़्म एंड ड्रग डिपेंडेंस ने 'अल्कोहल अवेयरनेस मंथ' की शुरुआत की और जागरुकता बढ़ाने के लिए लोगों को बहुत अधिक शराब पीने से जुड़ी हानियों, खतरों और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूक करने लगे। इस महीने इन लोगों के परिवारों का ध्यान भी आकर्षित किया जाता है ताकि उन्हें यह पता चल सके कि वे इस गंभीर मुद्दे से किस तरह निपट सकते हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की अल्कोहल एंड हेल्थ 2018 पर ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में दुनियाभर में शराब के विषाक्त प्रभाव के कारण 30 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। भारत में, यह आंकड़ा प्रतिवर्ष 200 हजार था। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में शराब की खपत 2005 और 2016 के बीच बढ़कर दोगुना हो गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सहयोग से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किए गए एक अन्य सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में लगभग 57 मिलियन लोगों को शराब पर निर्भरता के लिए उपचार की आवश्यकता है।

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कम उम्र में शराब पीने का चलन 
शराब के बारे में सबसे बुरी बात यह है कि यह वयस्कों और टीनेजर्स, दोनों को प्रभावित करती है। सितंबर 2017 में प्रकाशित नेशनल सर्वे ऑन ड्रग यूज एंड हेल्थ के अनुसार, अमेरिका में 12 से 17 वर्ष के बीच के 2.3 मिलियन टीनेजर हर महीने शराब पीते हैं। एक एनजीओ, कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग (सीएडीडी) के सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 23% लोग 18 साल की उम्र से पहले ही शराब पीना शुरू कर देते हैं। शोध के अनुसार शराब पीने की यह लत दुनियाभर में टीनेजर्स में मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण बन रही है।

इसके हानिकारक प्रभाव
कई लोग शराब पीने को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लेते हैं। दिनचर्या में ही शामिल कर लेते हैं, जिससे गंभीर हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं। अनियंत्रित शराब पीने और इसके बिना न रह सकने की स्थिति का यह समय शराब की लत के तौर पर माना जाता है। यह एक लंबी अवधि की निरंतर बढ़ने वाली बीमारी का रूप ले लेती है। 

अत्यधिक शराब पीने से लीवर को खतरा, उच्च रक्तचाप, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, हृदय रोग, एनीमिया, डिमेंशिया और यहां तक कि अवसाद जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यह रेस्पांस टाइम और रिफ्लेक्सेस में देरी की वजह से कार दुर्घटना, पानी में डूबने जैसा जोखिम बढ़ाता है। शराब के नशे में लोग अक्सर तर्कहीन व्यवहार करते हैं जो अपमानजनक व्यवहार-शारीरिक, यौन शोषण और वित्तीय दुरुपयोग जैसी सामाजिक समस्या को बढ़ाता है। 

शराब की लत के लक्षण 

शराब पीना सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अच्छी तरह से स्वीकार किया जा चुका है। यह पारिवारिक कार्यक्रमों, उत्सवों, सामान्य लंच और रात्रिभोज का एक स्थिर हिस्सा बन गई है। शराब की लत के बारे में सबसे बड़ा जोखिम इसका डाइग्नोज है। इस वजह से शराब के बहुत ज्यादा इस्तेमाल और इस पर निर्भरता की स्थिति जानने के लिए निम्न संकेतों पर नज़र रखना आवश्यक है:

    • किसी भी समय, विशेष रूप से सुबह जैसे असामान्य समय शराब पीना या इसे हर जगह बोतल में साथ लेकर जाना, परिणामस्वरूप व्यक्तिगत जिम्मेदारियों का निर्वहन न करना, जैसे- काम न करना, परिवार की देखभाल न करना, आदि। 
    • मात्रा में वृद्धि और शराब का असर कम होते जाना  
    • केवल उन कार्यक्रमों में स्वयं को शामिल करना जिनमें शराब शामिल हो
    • व्यवहार में बदलाव- जैसे, छोटी-छोटी बात में चिड़चिड़ाना, एकदम भावुक हो जाना, काम पर एकाग्रता की कमी। 
    • महत्वपूर्ण व्यावसायिक, सामाजिक या मनोरंजक गतिविधियों में दिलचस्पी न लेना।


कितना पर्याप्त है? 

शराब पीने की लत की जांच और मूल्यांकन में मदद के लिए, डब्ल्यूएचओ ने अल्कोहल यूज डिसऑर्डर्स आइडेंटिफिकेशन टेस्ट (ऑडिट) विकसित किया है। यह टेस्ट इस बात की पहचान करता है कि ज्यादा शराब पी ली गई है और पीने वालों के जोखिम को कम करने में मदद करने के लिए फ्रेमवर्क प्रदान करता है। यह आज उपलब्ध सबसे सटीक परीक्षण है और इसमें 10 प्रश्न शराब की मात्रा और आवृत्ति, पीने के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं को आधार बनाते हैं। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर के आधार पर एक अंक दिया जाता है। यदि आपने 8 से अधिक अंक हासिल किए हैं, तो यह शराब से संबंधित समस्याओं की ओर इंगित करता है।

एक और संकेतक है जो खतरे की घंटी बजाता है। इसके अनुसार महिलाओं के लिए प्रति सप्ताह सात से ज्यादा ड्रिंक या एक दिन में तीन से अधिक ड्रिंक, वहीं पुरुषों के लिए सप्ताह में 14 से अधिक ड्रिंक और एक दिन में चार से ज्यादा ड्रिंक खतरे का संकेत है। 
 
एक स्टैंडर्ड ड्रिंक अलग-अलग देश में अलग है,  उदाहरण के लिए-

    • अमेरिका में, एक ड्रिंक शुद्ध अल्कोहल का 14.0 ग्राम (0.6 आउंस) होता है 

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डब्ल्यूएचओ की परिभाषा के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं के लिए 10 ग्राम अल्कोहल कम जोखिम की सीमा है। साथ ही जो बियर की पिंट, हार्ड ड्रिंक्स के पैग्स (30 मिली) आदि पीते हैं।
 
लेकिन, लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पीने का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है। यहां तक कि अल्कोहल की कम मात्रा भी किसी भी व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकती है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान कर सकती है।

शराब पीने की कानूनी उम्र 
भले ही विभिन्न देशों में शराब पीने के लिए अलग-अलग न्यूनतम उम्र निर्धारित हो,  उदाहरण के लिए- भारत में यह 25 वर्ष, यूनाइटेड किंगडम में 21 वर्ष, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में 18 वर्ष है फिर भी लोग जल्दी शुरू कर देते हैं। इसके कुछ सबसे बड़े कारण हैं सामाजिक स्वीकृति, आसान उपलब्धता, और सभी मूल्य सीमाओं में उपलब्धता। इस प्रकार, शराब की खपत को रोकने के लिए सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए ·

    • शराब पीने की उम्र का सख्ती से पालन
    • विशेष रूप से युवाओं के लिए बाजार का विनियमन
    • सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बढ़ाना जो इसके दुष्परिणाम उजागर करता हो

इलाज
इस सभी चर्चा में सकारात्मक तथ्य यह है कि शराब की लत का उपचार संभव है। डायग्नोज होने के बाद डॉक्टर उपचार के विकल्पों की सलाह दे सकता है, जो लत के चरण और गंभीरता के आधार पर भिन्न-भिन्न होता है। मोटे तौर पर, थेरेपी में काउंसलिंग, दवा, डिटॉक्सीफिकेशन और इन-पेशेंट रिहैब शामिल हैं।

अंत में, यह समझना बेहद जरूरी है कि शराब की लत एक बीमारी है जिसे ठीक किया जा सकता है। इस साल की थीम है- हेल्प फॉर टुडे, होप फॉर टुमारो यानी आज मदद, कल उम्मीद। यह उसके लिए सटीक है जो अपनी लत की गंभीरता को अनुभव करता है और मदद स्वीकार करने को तैयार है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वैश्विक स्तर पर 5.1 प्रतिशत बीमारियों और चोटों में शराब की ही नकारात्मक भूमिका होती है। यह पुरुषों में 7.7 और महिलाओं में 2.6 प्रतिशत मौत का कारण भी बनती है। ऐसे में यह वक्त सक्रिय होने और अपने चहेतों को शराब के विनाशकारी प्रभावों से बचाने का है।  
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