Chhatrapati Shivaji Maharaj Punyatithi 2023: पुण्यतिथि पर पढ़ें छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की रोचक बातें
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े कई किस्से हैं, जो देशवासियों को गौरवान्वित करते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें।
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Chhatrapati Shivaji Maharaj Punyatithi: मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की आज पुण्यतिथि है। छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा सम्राट थे। इतिहास के पन्नों में शिवाजी महाराज की शौर्यगाथा सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। उनकी वीरता की मिसाल महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में दी जाती है। जब भी छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लिया जाता है, हर कोई गर्व और ऊर्जा को महसूस करता है। शिवाजी महाराज की जन्म 19 फरवरी 1630 में हुआ था। उन्होंने मुगलों को परास्त कर मराठा साम्राज्य को बुलंद किया। वहीं 3 अप्रैल 1680 को उनका निधन हो गया। आज ही के दिन गंभीर बीमारी के कारण शिवाजी महाराज ने पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में अपने प्राण त्याग दिए। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े कई किस्से हैं, जो देशवासियों को गौरवान्वित करते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें।
15 साल की उम्र में किया मुगलों पर हमला
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म शाहजी भोसले और माता जीजाबाई के घर पर 19 फरवरी 1630 में हुआ था। उनके जन्म के समय भारत मुगल आक्रमणकारियों से घिरा हुआ था। मुगल सल्तनत ने दिल्ली समेत पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था। जब हिंदुओं पर संकट आन पड़ी तो शिवाजी महाराज ने महज 15 वर्ष की आयु में हिंदू साम्राज्य को स्थापित करने के लिए पहला आक्रमण किया।
गोरिल्ला युद्ध में पारंगत थे शिवाजी महाराज
मुगलों को धूल चटाने के लिए शिवाजी ने बीजापुर पर हमला कर दिया। वह युद्ध में कुशल रणनीति तैयार करने में सक्षम थे और गोरिल्ला युद्ध पारंगत थे। इसी कौशल से शिवाजी ने बीजापुर के शासक आदिलशाह को मौत के घाट उतार दिया।
धोखे से औरंगजेब ने बनाया था बंदी
शिवाजी ने बीजापुर के चार किलों पर कब्जा कर लिया था। शिवाजी महाराज की वीरता और पराक्रम के किस्से बढ़ने लगे तो औरंगजेब डर गया। उसने छल से संधि वार्तालाप के लिए शिवाजी को आगरा बुलाया और उन्हें बंदी बना लिया। हालांकि शिवाजी उनके कब्जे में अधिक दिन न रहे और फल की टोकरी में बैठकर मुगलों के बंदीगृह से भाग निकले। उसके बाद उन्होंने मुगल सल्तनत के खिलाफ जंग छेड़ दी।