देश की आजादी का जश्न मनाएं, इन पांच देशभक्ति से सराबोर जगह घूम आएं
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अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी के रूप में भी जाना जाता है। यह जेल अब एक म्यूजियम और स्मारक बन गई है। सेलुलर जेल में बने म्यूजियम और स्मारक में आने पर आपको अंदाजा होगा कि स्वतंत्रता सेनानियों हमारे देश को आजाद कराने के लिए कितनी यातना सही थी।
मुंबई का अगस्त क्रांति मैदान में गांधीजी ने 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन छेड़ा था। यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता में सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से है। आज इस मैदान को गोवली मैदान कहा जाता है। आप स्वतंत्रता दिवस पर इस मैदान को देखने जा सकते हैं।
सन 1931 में चंद्रशेखर आजाद प्रयागराज के इस पार्क में ब्रिटिश सैनिकों के साथ लड़े थे। इस पार्क में उन्होंने मात्र 25 साल की उम्र में अपने प्राणों को न्यौछावर किया था। बता दें कि जब चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश पुलिस ने घेर लिया। तब उन्होंने सोचा कि ब्रिटिश सैनिकों की गोली से नहीं मरेंगे और उन्होंने खुद को इस जगह पर गोली मार ली। इस जगह को अब चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है। पार्क में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगी हुई है।
सन 1919 में जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन स्वतंत्रता सेनानियों ने रॉलेट ऐक्ट में विरोध में एक बैठक की योजना बनाई। इसके बाद जब लोग यहां आए तो बिना किसी चेतावनी के जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दे दिया। जालियांवाला बाग हत्याकांड में कई सौ लोग शहीद हुए थे। इन शहीद की याद में जलियांवाला बाग में मेमोरियल बनाया गया है। यहां पर दीवारों में बुलेट का निशान देखे जा सकते हैं। इन निशानों को देखकर आप अत्याचार का अंदाजा लगा सकते हैं।