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यूपीएससी परीक्षा नहीं दे पाएंगे ट्रांसजेंडर श्रेणी के परीक्षार्थी

Thu, 18 Jun 2015 11:48 AM IST
Updated Thu, 18 Jun 2015 11:48 AM IST
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Transgender category candidate will not be able for UPSC exam

सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा में वर्तमान में ट्रांसजेंडर को फॉर्म में अलग से अपनी पहचान के लिए कॉलम नहीं मिलेगा। यानी फिलहाल ट्रांसजेंडर श्रेणी के परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते। केंद्र व संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने हाईकोर्ट में स्पष्ट कर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में ट्रांसजेंडरों के संबंध में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है।

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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता व न्यायमूर्ति पीएस तेजी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार व यूपीएससी के अधिवक्ता के तर्क सुनने के बाद कहा कि चिकित्सा शब्द कोश में ट्रांसजेंडर की कोई परिभाषा नहीं है। उनकी पहचान करने की कोई विशेषताएं भी नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि ट्रांसजेंडर को प्रमाणित करने वाली एजेंसी कौन होगी।
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इससे 15 अप्रैल 2014 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को लागू करने में दिक्कतें आ रहीं हैं जिसमें ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया गया था। खंडपीठ ने अब 27 जुलाई को सुनवाई तय की है।
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केंद्र सरकार के कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग के अधिवक्ता ने कहा कि इस मुद्दे को केवल सर्वोच्च न्यायालय ही स्पष्ट कर सकता है। स्पष्टीकरण के बाद ही वह इस मसले पर ट्रांसजेंडरों के फायदे के लिए कोई नियम बना सकते हैं। जिसमें उनके आरक्षण समेत अन्य बातें शामिल होंगी।

सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल कर ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में प्रमाणित करने वाली एजेंसी का नाम, ट्रांसजेंडर की परिभाषा आदि बातें स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है। इस अर्जी पर अदालत की छुट्टियों के बाद सुनवाई होने की संभावना है।

क्या है मामला

Transgender category candidate will not be able for UPSC exam

पेश मामले में अधिवक्ता जमशेद अंसारी ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में लिंग पात्रता मानदंड पर यूपीएससी द्वारा सिविल सेवा परीक्षा के लिए जारी नोटिस को खारिज करने का आग्रह किया है। याचिका में गुहार लगाई गई है कि सिविल सेवा परीक्षा आवेदन फॉर्म में विकल्प के रूप में ट्रांसजेंडर को भी शामिल किया जाए।

यह परीक्षा आगामी 23 अगस्त को होनी है। परीक्षा के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 19 जून है। आवेदन फॉर्म में तीसरे विकल्प के रूप में ट्रांसजेंडर को शामिल नहीं किया गया है, जो गलत है।

अगर सिविल सेवा परीक्षा में ट्रांसजेंडरों को बैठने का मौका दिया जाता है तो पूरे ट्रांसजेंडर समाज के लिए यह काफी फायदेमंद होगा। चूंकि हमेशा से यह लोग समाज से अलग-थलग रहें हैं। सरकारी नौकरियों में इन्हें स्थान नहीं दिया जाता है। यह लोग समाज में पिछड़ेपन से ग्रसित हैं।

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