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खुशखबर! सऊदी अरब का कफाला सिस्टम हुआ खत्म, लाखों भारतीय कामगारों को मिलेगा ये लाभ

Fri, 06 Nov 2020 03:01 PM IST
शुभांगी गुप्ता जॉब डेस्क, अमर उजाला
जॉब डेस्क, अमर उजाला Published by: शुभांगी गुप्ता Updated Fri, 06 Nov 2020 03:01 PM IST
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Ban of Saudi Arabia Kafala System, what is Kafala System? Reforms In Kafala System, News in hindi

सऊदी अरब ने दूसरे देशों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से वहां काम करने वाले लाखों भारतीय कामगारों को भी फायदा होगा। इसके तहत कामगारों की जिंदगी में नियोक्ताओं (नौकरी देने वाले व्यक्ति या कंपनी) का नियंत्रण कम हो जाएगा। बता दें कि, यह नए नियम मार्च 2021 से लागू होंगे।

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नौकरी भी बदल सकेंगे प्रवासी कामगार - 
सऊदी अरब के मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय ने कहा कि इन सुधारों के तहत विदेशी कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह काम करने का अवसर मिलेगा। नौकरी छोड़ने और देश में फिर से प्रवेश करने की अनुमति भी दी जाएगी। इसके अलावा वर्कर्स का जो अपने नियोक्ताओं के साथ सर्विस कॉन्ट्रैक्ट है, वह भी ऑनलाइन होगा। इन सुधारों की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी।
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कफाला सिस्टम के सख्त कानून होंगे खत्म - 

उप मंत्री अब्दुल्ला बिन नासिर अबुथनैन ने कहा कि, हम देश में बेहतर श्रम बाजार और वर्कर्स के लिए अच्छे काम का माहौल बनाना चाहते हैं। श्रम कानूनों में इन बदलावों से विजन 2030 के उद्देश्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।

कतर ने भी किया है श्रम कानूनों में बदलाव
वर्ष 2022 में फीफा विश्व कप की मेजबानी करने की तैयारी कर रहे कतर ने हाल में अपने श्रम कानूनों में भी ऐसे ही बदलाव किए हैं।

 ये भी पढ़ें : Sarkari Naukri 2020 Live Updates: तलाश है सरकारी नौकरी की, तो इन विभागों में कर सकते हैं आवेदन

क्या है कफाला सिस्टम ?

सऊदी अरब का कफाला सिस्टम श्रमिकों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाता है। सीधे शब्दों में कहें तो दूसरे देश से आकर यहां नौकरी करने वाले मजदूर के पास उत्पीड़न से बचने का कोई रास्ता नहीं होता। वह अपनी मर्जी से नौकरी नहीं छोड़ सकते, देश से बाहर जाने के लिए भी उन्हें अपने नियोक्ता से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना नियोक्ता की अनुमति के वह नौकरी बदल सकते हैं और न ही वापस जा सकते हैं। इतना ही नहीं कई नियोक्ता अपने मजदूरों के पासपोर्ट तक भी जब्त कर लेते हैं और आसानी से लौटाते भी नहीं हैं।

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