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Shibu Soren Death: शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर विशेष विमान से रांची लाया गया, एयरपोर्ट पर भारी सुरक्षा व्यवस्था

Mon, 04 Aug 2025 07:48 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 04 Aug 2025 07:48 PM IST
सार

Jharkhand: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर दिल्ली से रांची लाया गया। कल यानी मंगलवार को नेमरा गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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Shibu Soren Mortal Remains Brought to Ranchi by Special Aircraft Amid Tight Security
शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर विशेष विमान से रांची लाया गया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर सोमवार को दिल्ली से विशेष विमान के जरिए रांची लाया गया। जैसे ही विमान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर पहुंचा, वहां पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिबू सोरेन अमर रहें के नारों से पूरा एयरपोर्ट गूंज उठा।

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पार्थिव शरीर को एक सजे हुए वाहन में रखा गया, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके छोटे भाई विधायक बसंत सोरेन भी मौजूद थे। पार्थिव वाहन एयरपोर्ट से राजधानी रांची की सड़कों से गुजरते हुए मोरहाबादी मैदान स्थित सरकारी आवास लाया गया, जहां आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

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सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, 5 अगस्त की सुबह पार्थिव शरीर को पहले राजभवन, फिर पार्टी कार्यालय, और उसके बाद झारखंड विधानसभा ले जाया जाएगा। विधानसभा में सुबह 11 बजे राज्य सरकार और विधायकों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।

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इसके बाद, पार्थिव शरीर को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव, जो उनका पैतृक स्थान है, ले जाया जाएगा। वहां दोपहर 3 बजे आदिवासी रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

झारखंड सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। देशभर से श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने शिबू सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रदेश भाजपा, झामुमो, आजसू और राजद के नेताओं ने क्या कहा
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव बिनोद पाण्डेय ने शिबू सोरेन के निधन को एक युग के अंत जैसा बताया। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु ने सिर्फ एक राजनीतिक संगठन खड़ा नहीं किया, बल्कि समतामूलक और स्वाभिमानी झारखंड की परिकल्पना को साकार किया। वे संगठन के लिए विचार पुरुष, मार्गदर्शक और अपनेपन का दूसरा नाम थे।
 
झामुमो के केन्द्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि गुरुजी ने सदैव धारा के विपरीत संघर्ष करते हुए वंचित समाज को जागरूक किया। उन्होंने जीवन भर अज्ञानता के विरुद्ध शिक्षा, शोषण के खिलाफ संघर्ष और सम्मानजनक जीवन के लिए लड़ाई लड़ी। भट्टाचार्य ने कहा कि आज भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी शिक्षा और विचार संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए संघर्ष की प्रेरणा बने रहेंगे।
 
‘यह यात्रा थी आंदोलन, बलिदान और चेतना की’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने शिबू सोरेन को 'दिशोम गुरु' की उपाधि तक की संघर्षशील यात्रा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पिता की हत्या के बाद उन्होंने महाजनी प्रथा, शराबबंदी और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ जन अभियान चलाए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का झारखंड अलग राज्य की स्थापना में योगदान भुलाया नहीं जा सकता। वे जनता के सच्चे संघर्षशील नेता थे, जिनका जीवन आंदोलन और सामाजिक सुधार का उदाहरण है।

पढ़ें- Shibu Soren Death: शिबू सोरेन के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक, रांची लाया गया पार्थिव शरीर
 
‘जल, जंगल, जमीन के रक्षक थे शिबू सोरेन’
राजद के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने कहा कि गुरुजी आदिवासी समाज के सबसे बड़े नेता थे। उन्होंने जीवन भर गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा की रक्षा के लिए अडिग और निर्भीक संघर्ष किया। वे न्यायप्रिय जननेता थे, जिन्होंने झारखंड को उसका नाम और पहचान दी।


 
‘जयपाल सिंह के बाद आंदोलन को दिशा देने वाले शख्स’
आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो ने शिबू सोरेन के निधन को झारखंड के एक युग के अवसान के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह के बाद जो झारखंड आंदोलन बिखर गया था, उसे गुरुजी ने फिर से संगठित कर नई ऊर्जा और दिशा दी। वे आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए जूझते रहे और उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
 
महतो ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से गुरुजी को नजदीक से जाना और उनके अनुभवों से अपने राजनीतिक जीवन की अमूल्य धरोहर प्राप्त की। उनका जाना सिर्फ एक नेता की मृत्यु नहीं, एक विचार, आंदोलन और संघर्ष के अंत जैसा है।
 
‘झारखंड को दिशा देने वाले थे दिशोम गुरु’
रांची महानगर कांग्रेस के प्रवक्ता अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिबू सोरेन का निधन झारखंड और देश के लिए अपूर्णनीय क्षति है। उन्होंने उन्हें झारखंड राज्य के प्रणेता और आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाने वाले नेता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने वंचित समाज के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष किया और उन्हीं के संघर्ष से झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला।

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