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झारखंड: गिरिडीह उपचुनाव में झामुमो और भाजपा के बीच मुकाबले के आसार, जयराम महतो बिगाड़ सकते हैं समीकरण

Sun, 04 Oct 2026 03:08 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sun, 04 Oct 2026 03:08 PM IST
सार

दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन से खाली हुई गिरिडीह सीट पर उपचुनाव की तैयारी तेज हो रही है। झामुमो से श्वेता शर्मा और भाजपा से निर्भय शाहाबादी के नाम चर्चा में हैं। जयराम महतो की एंट्री मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।

 

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Direct contest between JMM and BJP in Giridih by-election; Jairam Mahto could play spoiler.
दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन से खाली हुई गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव आयोग को निर्धारित समयसीमा के भीतर उपचुनाव कराना है। ऐसे में झामुमो और भाजपा ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। फिलहाल दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो की एंट्री चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना सकती है।

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गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में कुर्मी मतदाताओं की अच्छी संख्या है। इस वोट बैंक पर जयराम महतो की मजबूत पकड़ मानी जाती है। 2024 के विधानसभा चुनाव में जयराम महतो और जेएलकेएम ने कई सीटों पर भाजपा और झामुमो के चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया था। ऐसे में यदि जेएलकेएम उपचुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारता है, तो उसके वोटों का सीधा असर दोनों प्रमुख दलों के चुनावी गणित पर पड़ सकता है।

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2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य सोनू ने भाजपा प्रत्याशी को करीब साढ़े तीन हजार वोटों के अंतर से हराया था। भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी। ऐसे में उपचुनाव झामुमो के लिए अपनी सीट बचाने, जबकि भाजपा के लिए अपना पुराना गढ़ वापस हासिल करने की चुनौती होगा।

झामुमो की ओर से सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा के नाम की सबसे अधिक चर्चा है। पार्टी उनके पक्ष में सहानुभूति वोट के साथ गठबंधन की ताकत को भी चुनावी हथियार बनाएगी। कल्पना सोरेन समेत झामुमो के बड़े नेता प्रचार अभियान में उतर सकते हैं। वहीं, भाजपा की ओर से पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी के नाम की चर्चा है।

इस उपचुनाव को भाजपा के नए संगठनात्मक नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के लिए भी अहम परीक्षा माना जा रहा है। वहीं, झामुमो के सामने दिवंगत मंत्री की राजनीतिक विरासत को वोटों में बदलने की चुनौती होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जयराम महतो उपचुनाव में किसे मैदान में उतारते हैं। यदि जेएलकेएम मजबूत प्रत्याशी उतारता है, तो कुर्मी वोटों में सेंधमारी हो सकती है और मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। दुर्गापूजा के बाद चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।

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