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झारखंड: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सहायक आचार्य भर्ती के 43 पद सुरक्षित रखने का निर्देश
Thu, 17 Sep 2026 09:04 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 17 Sep 2026 09:04 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2023 के मामले में 43 पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने उन अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए यह आदेश दिया, जिन्होंने अपनी वर्ग-श्रेणी में अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों से अधिक अंक हासिल किए, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ।
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झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2023 के मामले में बड़ा निर्णय सुनाते हुए 43 पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने यह आदेश उन अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जारी किया है, जिन्होंने अपनी वर्ग-श्रेणी में अंतिम रूप से चयनित प्रत्याशी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, लेकिन फिर भी उनका चयन नहीं हो सका। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को अगली तिथि से पहले विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
यह मामला आदित्य कुमार और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि प्रतियोगी परीक्षा में उनके प्राप्तांक अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में बेहतर हैं। इसके बाद भी चयन आयोग ने उनके नाम की अनुशंसा राज्य सरकार को नहीं भेजी।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आयोग की इस कार्यप्रणाली के कारण वे मेधावी होने के बावजूद अवसर से वंचित रह गए हैं। अभ्यर्थियों ने गुहार लगाई कि आयोग को उनकी मेधा सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए राज्य सरकार के पास सिफारिश भेजने का आदेश दिया जाए।
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चयन प्रक्रिया में उपेक्षा और अभ्यर्थियों का दावा
याचिका में अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि कर्मचारी चयन आयोग ने चयन प्रक्रिया के दौरान मेधा क्रम का सही तरीके से अनुपालन नहीं किया। संबंधित श्रेणियों में कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को अवसर दे दिया गया, जबकि अधिक अंक लाने वाले योग्य अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अभ्यर्थियों ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि परीक्षा परिणाम में उनके अंक अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक दर्ज हैं। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से अलग रखना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और नियमों के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया के समस्त अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने और योग्य उम्मीदवारों के प्राप्तांकों के अनुसार नियुक्ति अनुशंसा भेजने का आग्रह किया है।
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आयोग से विस्तृत जवाब तलब और सीटें सुरक्षित
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि आयोग को आगामी सुनवाई से पूर्व इस पूरे मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए विस्तृत जवाब हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के संभावित विधिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 43 पद आरक्षित रखने की व्यवस्था दी है। यानी जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक इन 43 पदों पर भर्ती की स्थिति यथावत रहेगी। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर तय की है।
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यह मामला आदित्य कुमार और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि प्रतियोगी परीक्षा में उनके प्राप्तांक अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में बेहतर हैं। इसके बाद भी चयन आयोग ने उनके नाम की अनुशंसा राज्य सरकार को नहीं भेजी।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आयोग की इस कार्यप्रणाली के कारण वे मेधावी होने के बावजूद अवसर से वंचित रह गए हैं। अभ्यर्थियों ने गुहार लगाई कि आयोग को उनकी मेधा सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए राज्य सरकार के पास सिफारिश भेजने का आदेश दिया जाए।
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चयन प्रक्रिया में उपेक्षा और अभ्यर्थियों का दावा
याचिका में अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि कर्मचारी चयन आयोग ने चयन प्रक्रिया के दौरान मेधा क्रम का सही तरीके से अनुपालन नहीं किया। संबंधित श्रेणियों में कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को अवसर दे दिया गया, जबकि अधिक अंक लाने वाले योग्य अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अभ्यर्थियों ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि परीक्षा परिणाम में उनके अंक अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक दर्ज हैं। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से अलग रखना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और नियमों के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया के समस्त अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने और योग्य उम्मीदवारों के प्राप्तांकों के अनुसार नियुक्ति अनुशंसा भेजने का आग्रह किया है।
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आयोग से विस्तृत जवाब तलब और सीटें सुरक्षित
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि आयोग को आगामी सुनवाई से पूर्व इस पूरे मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए विस्तृत जवाब हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के संभावित विधिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 43 पद आरक्षित रखने की व्यवस्था दी है। यानी जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक इन 43 पदों पर भर्ती की स्थिति यथावत रहेगी। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर तय की है।