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झारखंड: डीजीपी नियुक्ति पर केंद्र बनाम राज्य, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद; 2025 के नियमों को लेकर उठी ये मांग
Wed, 07 Oct 2026 06:51 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 07 Oct 2026 06:51 PM IST
सार
झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने 2025 में डीजीपी नियुक्ति के लिए नियम बनाते समय सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति विवाद में केंद्र से शीर्ष अदालत का रुख किया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए वर्ष 2025 में नियम बनाते समय सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया।
नियुक्तियों को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाया। केंद्र सरकार ने झारखंड को डीजीपी की नियुक्ति में उसके पुराने निर्देशों का पालन करने का आदेश देने की मांग की है। साथ ही 2025 के नियम के तहत की गई नियुक्तियों को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया
केंद्र के अनुसार, झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को ‘झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति नियम, 2025’ अधिसूचित किए थे। केंद्र का आरोप है कि इन नियमों में सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006, 3 जुलाई 2018, 16 जनवरी 2019 और 13 मार्च 2019 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के 3 जुलाई 2018 के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकारों को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को अधिकारियों के नाम भेजने होते हैं। यूपीएससी इन नामों के आधार पर पैनल तैयार करता है और राज्य सरकार को उसी पैनल में से डीजीपी नियुक्त करना होता है।
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स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को मंजूरी दी
केंद्र का आरोप है कि झारखंड ने 2025 के नियम बनाने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति भी नहीं ली। इसके बाद 2 फरवरी 2025 को आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को दो वर्ष के लिए झारखंड का डीजीपी नियुक्त किया गया। केंद्र की अर्जी के अनुसार, नियुक्ति के समय गुप्ता की सेवा में करीब तीन महीने ही बचे थे और उनकी सेवानिवृत्ति 30 अप्रैल 2025 को होनी थी। गृह मंत्रालय ने 22 अप्रैल, 3 मई और 23 मई 2025 को पत्र भेजकर नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। बाद में झारखंड सरकार ने 6 नवंबर 2025 को गुप्ता की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को मंजूरी दी।
गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र भेजा
इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को झारखंड सरकार ने 2025 की नियमावली में संशोधन कर डीजीपी नियुक्ति के लिए छह महीने की न्यूनतम बची सेवा की शर्त हटा दी। अगले ही दिन, 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त किया गया। केंद्र के अनुसार, मिश्रा 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। इस नियुक्ति पर भी केंद्र ने आपत्ति जताई। जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र भेजकर 2025 की नियमावली और मिश्रा की नियुक्ति रद्द करने तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने को कहा।
ये भी पढ़ें- झारखंड: ‘इरफान अंसारी दूसरे औरंगजेब’, भाजपा नेता पशुपति नाथ सिंह का बड़ा हमला; पिता को लेकर लगाए गंभीर आरोप
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति के मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्य से अनुपालन हलफनामा मांगा था। अदालत ने यह भी पूछा था कि उसके निर्देश के अनुसार डीजीपी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव यूपीएससी को क्यों नहीं भेजा गया। इसी मामले में अब केंद्र ने नई अर्जी दाखिल कर 2025 की नियमावली और उसके तहत की गई नियुक्तियों को चुनौती दी है।
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नियुक्तियों को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाया। केंद्र सरकार ने झारखंड को डीजीपी की नियुक्ति में उसके पुराने निर्देशों का पालन करने का आदेश देने की मांग की है। साथ ही 2025 के नियम के तहत की गई नियुक्तियों को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
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इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया
केंद्र के अनुसार, झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को ‘झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति नियम, 2025’ अधिसूचित किए थे। केंद्र का आरोप है कि इन नियमों में सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006, 3 जुलाई 2018, 16 जनवरी 2019 और 13 मार्च 2019 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के 3 जुलाई 2018 के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकारों को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को अधिकारियों के नाम भेजने होते हैं। यूपीएससी इन नामों के आधार पर पैनल तैयार करता है और राज्य सरकार को उसी पैनल में से डीजीपी नियुक्त करना होता है।
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स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को मंजूरी दी
केंद्र का आरोप है कि झारखंड ने 2025 के नियम बनाने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति भी नहीं ली। इसके बाद 2 फरवरी 2025 को आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को दो वर्ष के लिए झारखंड का डीजीपी नियुक्त किया गया। केंद्र की अर्जी के अनुसार, नियुक्ति के समय गुप्ता की सेवा में करीब तीन महीने ही बचे थे और उनकी सेवानिवृत्ति 30 अप्रैल 2025 को होनी थी। गृह मंत्रालय ने 22 अप्रैल, 3 मई और 23 मई 2025 को पत्र भेजकर नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। बाद में झारखंड सरकार ने 6 नवंबर 2025 को गुप्ता की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को मंजूरी दी।
गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र भेजा
इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को झारखंड सरकार ने 2025 की नियमावली में संशोधन कर डीजीपी नियुक्ति के लिए छह महीने की न्यूनतम बची सेवा की शर्त हटा दी। अगले ही दिन, 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त किया गया। केंद्र के अनुसार, मिश्रा 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। इस नियुक्ति पर भी केंद्र ने आपत्ति जताई। जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र भेजकर 2025 की नियमावली और मिश्रा की नियुक्ति रद्द करने तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने को कहा।
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मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति के मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्य से अनुपालन हलफनामा मांगा था। अदालत ने यह भी पूछा था कि उसके निर्देश के अनुसार डीजीपी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव यूपीएससी को क्यों नहीं भेजा गया। इसी मामले में अब केंद्र ने नई अर्जी दाखिल कर 2025 की नियमावली और उसके तहत की गई नियुक्तियों को चुनौती दी है।