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झारखंड: पेंशन के नाम पर 3.64 करोड़ रुपये का खेल! CMPFO के चार कर्मचारियों पर सीबीआई का शिकंजा
Fri, 11 Sep 2026 10:16 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Fri, 11 Sep 2026 10:16 PM IST
सार
धनबाद के सीएमपीएफओ में 3.64 करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले का खुलासा हुआ है। सीबीआई ने चार कर्मचारियों समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ फर्जी पेंशन दावों को मंजूरी देने, रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी पद के दुरुपयोग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
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सीबीआई
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ) धनबाद में 3,64,48,052 रुपये के पेंशन घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद चार कर्मचारियों सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। संस्थान के मुख्य सतर्कता अधिकारी की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर सीबीआई धनबाद ने यह कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने बेइमानी, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने और सरकारी पद के दुरुपयोग के आरोपों में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शुरुआती स्तर पर संबंधित दस्तावेज की पड़ताल कर रहे हैं।
फर्जी पेंशन दावों का निस्तारण
मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत के अनुसार, आरोपी कर्मचारियों ने डीलिंग असिस्टेंट के रूप में काम करते हुए सीएमपीएफओ के तय नियमों का उल्लंघन किया। इन कर्मियों ने मार्च 2016 से लेकर सितंबर 2016 की अवधि के दौरान कुल 142 फर्जी पेंशन क्लेम प्रोसेस किए। इस दौरान सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी भी की गई। इन फर्जी दावों के माध्यम से मासिक पेंशन के अलावा पेंशन एरियर के रूप में कुल 3,64,48,052 रुपये का गलत भुगतान किया गया।
अधिकारियों और कर्मियों को किया नामजद
इस वित्तीय घोटाले में सीएमपीएफओ धनबाद और ओडिशा में पदस्थापित अधिकारियों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। इनमें धनबाद स्थित कार्यालय के सेक्शन ऑफिसर अचिंत्य कुमार, सेक्शन ऑफिसर अजय कुमार सिन्हा और सीएफपीएफ रीजनल ऑफिस धनबाद तीन के वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक मंजीत कुमार शामिल हैं। इनके साथ ही, ओडिशा के तालचेर स्थित रीजनल ऑफिस में तैनात सेक्शन ऑफिसर दीप कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार, इन सभी ने आपस में मिलकर आपराधिक साजिश रची और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गलत तरीके से सरकारी राशि निकाली।
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ये भी पढ़ें- झारखंड: 13 सितंबर को CDS और NDA की होगी परीक्षा, रांची के 21 केंद्रों के 200 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा
बीएनएस की आठ धाराओं में कार्रवाई
सीबीआई ने इस मामले में बीएनएस की कुल आठ धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें बीएनएस की धारा 318 धोखाधड़ी करना और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना, धारा 338 मूल्यवान प्रतिभूति या जाली दस्तावेज बनाना, धारा 336 धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी करना, धारा 340 जाली रिकॉर्ड को असली के रूप में इस्तेमाल करना और धारा 61(2) आपराधिक साजिश रचना शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ए) और धारा 13(2) लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत आरोपी सरकारी सेवकों की गिरफ्तारी और आपराधिक कदाचार के लिए कठोर सजा के प्रावधान हैं।
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फर्जी पेंशन दावों का निस्तारण
मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत के अनुसार, आरोपी कर्मचारियों ने डीलिंग असिस्टेंट के रूप में काम करते हुए सीएमपीएफओ के तय नियमों का उल्लंघन किया। इन कर्मियों ने मार्च 2016 से लेकर सितंबर 2016 की अवधि के दौरान कुल 142 फर्जी पेंशन क्लेम प्रोसेस किए। इस दौरान सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी भी की गई। इन फर्जी दावों के माध्यम से मासिक पेंशन के अलावा पेंशन एरियर के रूप में कुल 3,64,48,052 रुपये का गलत भुगतान किया गया।
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अधिकारियों और कर्मियों को किया नामजद
इस वित्तीय घोटाले में सीएमपीएफओ धनबाद और ओडिशा में पदस्थापित अधिकारियों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। इनमें धनबाद स्थित कार्यालय के सेक्शन ऑफिसर अचिंत्य कुमार, सेक्शन ऑफिसर अजय कुमार सिन्हा और सीएफपीएफ रीजनल ऑफिस धनबाद तीन के वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक मंजीत कुमार शामिल हैं। इनके साथ ही, ओडिशा के तालचेर स्थित रीजनल ऑफिस में तैनात सेक्शन ऑफिसर दीप कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार, इन सभी ने आपस में मिलकर आपराधिक साजिश रची और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गलत तरीके से सरकारी राशि निकाली।
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बीएनएस की आठ धाराओं में कार्रवाई
सीबीआई ने इस मामले में बीएनएस की कुल आठ धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें बीएनएस की धारा 318 धोखाधड़ी करना और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना, धारा 338 मूल्यवान प्रतिभूति या जाली दस्तावेज बनाना, धारा 336 धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी करना, धारा 340 जाली रिकॉर्ड को असली के रूप में इस्तेमाल करना और धारा 61(2) आपराधिक साजिश रचना शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ए) और धारा 13(2) लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत आरोपी सरकारी सेवकों की गिरफ्तारी और आपराधिक कदाचार के लिए कठोर सजा के प्रावधान हैं।