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झारखंड हाईकोर्ट: पुलिसकर्मियों पर हमले के मामले में आजसू प्रमुख-तीन नेताओं को जमानत, घायल पुलिसवालों को देने होंगे 10 हजार रुपये
Mon, 10 Jan 2022 11:19 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 10 Jan 2022 11:19 PM IST
सार
पिछले साल सितंबर में ओबीसी आरक्षण को लेकर आजसू कार्यकर्ता रांची के मोरहाबादी ग्राउंड में जुटकर आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिसकर्मियों से भिड़ंत हुई थी।
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सुदेश महतो
- फोटो : Sudesh Mahto Facebook
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विस्तार
झारखंड की हाईकोर्ट ने सोमवार को ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के अध्यक्ष सुदेश महतो और पार्टी के तीन अन्य नेताओं को पुलिसकर्मियों पर कथित हमले के मामले में जमानत दे दी। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चारों लोगों को घायल पुलिसकर्मियों को दस-दस हजार रुपये देने होंगे। यही उनकी जमानत की शर्त रखी गई है।
पिछले साल सितंबर में ओबीसी आरक्षण को लेकर आजसू कार्यकर्ता रांची के मोरहाबादी ग्राउंड में जुटकर आंदोलन कर रहे थे। आरोप है कि सुदेश महतो, पार्टी के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, नेता लंबोदर महतो और राम चंद्र साही ने समर्थकों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास को घेरने के लिए भड़काया था।
हालांकि, जैसे ही प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़े, पुलिसकर्मियों ने उनसे पीछे हटने के लिए कहा। इसे लेकर नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हो गई। घटना में आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस मामले में चारों नेताओं पर आईपीसी की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे।
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उधर आजसू नेताओं के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किलों को राजनीतिक षड़यंत्र में फंसाया गया और इनमें से एक भी दोषी नहीं था।
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पिछले साल सितंबर में ओबीसी आरक्षण को लेकर आजसू कार्यकर्ता रांची के मोरहाबादी ग्राउंड में जुटकर आंदोलन कर रहे थे। आरोप है कि सुदेश महतो, पार्टी के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, नेता लंबोदर महतो और राम चंद्र साही ने समर्थकों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास को घेरने के लिए भड़काया था।
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हालांकि, जैसे ही प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़े, पुलिसकर्मियों ने उनसे पीछे हटने के लिए कहा। इसे लेकर नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हो गई। घटना में आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस मामले में चारों नेताओं पर आईपीसी की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे।
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उधर आजसू नेताओं के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किलों को राजनीतिक षड़यंत्र में फंसाया गया और इनमें से एक भी दोषी नहीं था।