हमले के बीच जान पर खेलकर ली सेल्फी
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बस एक फोटो खींचना है। अपडेट ही डाल देंगे। वीडियो रिकॉर्डिंग हो जाए, तो दोस्तों से शेयर करूंगा। फिदायीन हमले के शिकार राजबाग पुलिस थाने के आसपास सुरक्षा घेरे में गोलियों की तड़तड़ाहट जारी थी। तो इस तरफ मुठभेड़ स्थल से बिल्कुल नजदीक स्मार्ट फोन लेकर पहुंचे लोगों खासकर युवाओं की सेल्फी क्रेज को संभालना मुश्किल हो गया।
कई युवाओं ने आखिरकार घटनास्थल की सेल्फी बना ही ली। समय पर इलाके की तारबंदी न किए जाने से हजारों की तादाद में लोग थाने के इर्द-गिर्द पहुंच गए। इससे जहां एक तरफ आतंकियों के पूरे सफाए के लिए छेड़े गए अभियान में कई बार खलल पड़ा, तो दूसरी तरफ स्मार्टफोन धारकों सहित सुरक्षा बलों की जान भी खतरे में पड़ती रही।
फाइनल असॉल्ट के बाद जब सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मार गिराने की बात कही, तो उसके बाद पुलिस थाना परिसर को सेनीटाइज किया जा रहा था। इस प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित किया जाता है कि घटनास्थल पर आवाजाही करने में अब कोई खतरा नहीं है, लेकिन इस प्रक्रिया के पूरा होने से पूर्व ही पुलिस थाना परिसर की दीवारों से लेकर परिसर के भीतर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बावजूद इसके के आतंकियों के पास मौजूद असलहे को अभी तक घटनास्थल से उठाया नहीं गया था। ऐसे में घटनास्थल पर त्रासदी की संभावना लगातार बनी रही।
आतंकी हमले ने रोक दी जिंदगी की रफ्तार
शनिवार की सुबह जब लोगों की आंख खुली, तो सनसनीखेज आतंकी वारदात की खबर ने लोगों को चौंका दिया। आतंकी हमले की खबर जैसे-जैसे फैली लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ लोग जहां घटनास्थल पर पहुंचे, तो अधिकतर लोग हमले की पल-पल की जानकारी लेने के लिए उत्सुक दिखे। हर तरफ दहशत का माहौल रहा।
स्कूल जाने वाले बच्चे हों या फिर दफ्तर का रुख करने वाले कर्मचारी, हमले की खबर मिलते ही लोग घरों को वापस लौटने लगे। सुबह राजबाग थाने में हुए आतंकी हमले की खबर कठुआ शहर में भी आग की तरह फैल गई। शहर के व्यापारिक संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों के साथ ही सरकारी कार्यालयों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित रहा।
लोगों में आतंकी हमले का रोष साफ देखा जा सकता था। लोग चौक-चौराहों पर इकट्ठा होने लगे। हमले में जैसे-जैसे मरने वालों का आंकड़ा सामने आया लोगों का रोष बढ़ता गया। इस बीच सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति भी यातायात प्रभावित रहने से काफी कम रही। वहीं नेशनल हाईवे को राजबाग से लखनपुर तक पूरी तरह से सील कर दिया गया।
लखनपुर, कालीबड़ी,पल्ली मोड़ पर पुलिस ने नाका लगाकर वाहनों को डायवर्ट किया। हाईवे के दोनों ओर नाकों के पास वाहनों की कतार लगी रहीं।
कम्युनिटी पुलिसिंग पर उठे सवाल
कम्युनिटी पुलिसिंग का स्लोगन देकर अवाम के करीब जाने के दावे खोखले साबित हो गए। आपात स्थिति में भी अवाम ने खाकी वर्दी की छीछालेदर करने से परहेज नहीं किया। विडंबना ही है कि एक तरफ थाने में घुसे आतंकियों के साथ पुलिस कर्मी जान पर खेल कर फिदायीन हमले से लोहा ले रहे थे, तो दूसरी तरफ बाहर जमा भीड़ ने पुलिस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हालात इस कदर बिगड़े कि सेना को हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों को समझाना पड़ा। ऐसा एक बार नहीं, बल्कि दो दफा हुआ जब मौके पर जमा भीड़ आपे से बाहर होती नजर आई। दरअसल यह अजीब स्थिति राजबाग पुलिस थाने के बिल्कुल नजदीक हाईवे पर सामने आई। मौके पर जमा सैकड़ों लोगों की भीड़ एक-एक कदम कर थाने के नजदीक जा रही थी।
इसी दौरान पुलिस ने लोगों को हटाने का प्रयास किया। कुछ पुलिस कर्मियों ने लाठियां बरसाने की बात कह दी, जिससे लोग भड़क गए। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे लोगों ने कहा कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली पुलिस आतंकी हमला कैसे रोक सकती है? लोगों ने हो-हल्ले के बीच सेना को बुलाए जाने के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया।
दो दफा बने ऐसे हालात के बीच मौके पर मौजूद बड़े अधिकारियों के लिए भी स्थिति को नियंत्रण में करना मुश्किल हो गया। मुठभेड़ खत्म होने के बाद आईजीपी जम्मू जोन दानिश राणा ने लोगों के इस बर्ताव पर गहरी आपत्ति जताते हुए विभागीय अधिकारियों से कहा कि आपात स्थिति में क्राउड कंट्रोल में किसी भी तरह से कोताही न बरती जाए।
वरिष्ठ अधिकारी इसके लिए अपनी निजी सुरक्षा गार्डों को विशेष हिदायतें जारी करें।