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Jammu News: विरासत के हुनर से 150 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

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women empowerment
- नीलोफर के प्रयासों से सोजनी कढ़ाई को मिल रही नई पहचान
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- स्कूलों-कॉलेजों में नई पीढ़ी को दे रहीं प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। पारिवारिक विरासत में मिली कला को रोजगार का जरिया बनाकर निलोफर आज महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। न्यू प्लॉट निवासी नीलोफर (45) वर्ष 2014 से सोजनी कढ़ाई के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प को सहेजने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। उन्होंने यह हुनर शादी से पहले अपनी मां और नानी से सीखा था। परिवार की इस विरासत को उन्होंने व्यवसाय का रूप दिया और अब दूसरी महिलाओं को भी इससे जोड़ रही हैं।
नीलोफर ने अपनी हस्तशिल्प सोसायटी के माध्यम से अब तक 100 से 150 महिलाओं को सोजनी कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया है। वह शॉल, सूट और साड़ियों पर कढ़ाई करती हैं। साथ ही महिलाओं को सरकारी स्तर पर पंजीकरण करवाने के लिए प्रेरित करती हैं, ताकि उन्हें अपनी कला की पहचान मिले और वे इसे रोजगार का साधन बना सकें।
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राज्य सरकार और वस्त्र मंत्रालय से पंजीकृत नीलोफर दिल्ली और पंजाब में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उन्होंने जैन बाजार में अपना आउटलेट भी खोला है, जहां सोजनी कढ़ाई से तैयार उत्पाद उपलब्ध हैं।
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पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए नीलोफर को हाल ही में रिसोर्स पर्सन के रूप में चुना गया है। इस भूमिका में वह जम्मू-कश्मीर के स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को सोजनी कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही हैं, ताकि यह विरासत समय के साथ लुप्त होने के बजाय नई पीढ़ी के हाथों आगे बढ़े।

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विरासत को सहेजकर बन रहीं आत्मनिर्भर
नीलोफर के साथ काम करने वाली पूजा, सोनिया, जसविंदर और मंजीत का कहना है कि सोजनी कढ़ाई उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत है। इस हुनर को आगे बढ़ाने के साथ रोजगार प्राप्त करना उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है। नीलोफर के प्रयासों से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और नई पहचान बनाने का अवसर मिला है। उनका मानना है कि पारंपरिक कला को सीखना और दूसरों को सिखाना विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक माध्यम है।
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