बुधवार को नहीं हुई गोलाबारी, तनाव बरकरार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुधवार को पाकिस्तान ने गोलाबारी नहीं की। पर इसके बावजूद सीमा और सीमा से सटे गांवों में सन्नाटा पसरा रहा। राहत शिविरों में रह रहे सीमांत गांवों के हजारों लोग अभी भी दहशत में हैं और घरों को नहीं लौटे हैं। बुधवार को भी दिन में ग्रामीण सरकारी वाहनों में सुरक्षा प्रबंधों के बीच मवेशियों को चारा देने पहुंचे और फिर राहत शिविरों को लौट गए।
वहीं पाकिस्तान की ओर से बीते दिनों की गई गोलाबारी में दागे गए कुछ शेल विस्फोट नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से बम निरोधक दस्तों की टीमें सीमांत गांवों में भेजी गईं हैं। एसएसपी अनिल मगोत्रा ने बताया कि सीमा पार से दागे गए दो शेल में विस्फोट नहीं होने की सूचना मिली थी।
दोनों को बम निरोधक दस्तों की मदद से निष्क्रिय बना दिया गया है। पाकिस्तान की ओर से कठुआ, हीरानगर, रामगढ़, सांबा और अरनिया सेक्टर में करीब 60 गांवों को निशाना बनाकर गोलाबारी की गई थी।
सीमावर्ती गांवों में पहुंचे बम निरोधक दस्ते
सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सभी इलाकों में गोलाबारी रुकने के बाद प्रशासन ने बम निरोधक दस्ते भेजे हैं, ताकि गोलाबारी में जो बम नहीं चले, उन्हें नष्ट किया जा सके। सांबा के एसएसपी अनिल मंगोत्रा के अनुसार उन्हें जानकारी मिली कि सीमा पार से आए दो बम फटे नहीं हैं। उसके बाद बम निरोधक दस्ता भेजा गया है।
एक बम मंगलवार को और एक आज नष्ट कर दिया गया। एसएसपी ने कहा कि प्रशासन नजर रखे हुए है और जहां उपयोग नहीं होने वाले बम की सूचना मिलेगी, वहां दस्ता भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने सांबा और कठुआ जिले के 60 से ज्यादा गांवों को निशाना बनाकर गोलाबारी की है। इनमें कई रिहायशी इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को भले ही गोलाबारी नहीं हुई, लेकिन सीमा पर तनाव बरकरार है। सीमांत इलाकों में लोगों को ज्यादा हलचल न करने की हिदायत दी गई है। खासकर सीमा के पास सामान्य दिनों की तरह वाहनों के आवागमन पर अंकुश लगाया गया है, ताकि पाक रेंजर हलचल देख गोलाबारी शुरू न करें।
पाक रेंजर दिन के समय में भी गोलाबारी कर रहे हैं
सीमा सुरक्षा बल के आईजी राकेश शर्मा भी मानते हैं कि पाक रेंजर दिन के समय में भी गोलाबारी कर रहे हैं। इसलिए सीमांत इलाके में कब किस ओर से मोर्टार आकर गिर जाए, पता नहीं। सीमांत इलाकों के ज्यादातर गांव खाली करवा दिए गए हैं।
लेकिन दिन के समय सिर्फ आवश्यक कामों (मसलन पशुओं को चारा डालने) के लिए गांव जाने वाले लोगों को ज्यादा हलचल न करने की सलाह दी गई है। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर बीएसएफ की ओर से ग्रामीणों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए वाहनों का इंतजाम किया गया है, ताकि पशुओं को चारा डालने के अलावा उनकी देखरेख कर सकें।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में सीमांत इलाकों के 20 हजार से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़ शिविरों और अपने रिश्तेदारों के पास पनाह लिए हुए हैं। शिविरों में रहने वाले लगभग दस हजार लोग दिन के समय गांव पहुंच पशुओं की देखरेख करते हैं और शाम ढलते ही लौट आते हैं।