50 हजार जुर्माना, फीस भी वापस करे कॉलेज: कोर्ट
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हाईकोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस बंसी लाल भट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माडल इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी (एमआईईटी) को आदेश देते हुए 33 छात्रों को 50-50 हजार रुपये देने को कहा है।
अदालत ने कहा कि दो सप्ताह के अंदर छात्रों को सीधे तौर पर राशि दी जाए या फिर अदालत के रजिस्ट्रार ज्यूडीशियल के पास रकम जमा करवाई जाए। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने कहा कि प्रवेश के दौरान छात्रों द्वारा जमा कराया गया पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क और अन्य फीस भी एमआईईटी को वापस लौटानी होगी।
एमआईईटी ने बड़ी चालाकी की
एमआईईटी और इंजीनियरिंग छात्रों की ओर से दायर अलग-अलग याचिका पर खंडपीठ ने छात्रों के वकील सुनील सेठी व वीनू गुप्ता, एमआईईटी के वकील पीएन रैना, एसएस अहमद, सरकार की एएजी सीमा शेखर, बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जाम (बीओपीईई) के वकील सुनील सेठी और जम्मू यूनिवर्सिटी के वकील डब्ल्यूएस नारगल की दलीलें सुनीं।
खंडपीठ ने पाया कि एमआईईटी ने अपने स्टूडेंट की सीटों को भरने के लिए अपना अलग तंत्र बनाया, क्योंकि 30 सितंबर 2013 तक बीओपीईई तमाम सीटों को भरने में असफल रहा। जबकि ऐसी प्रक्रिया किसी अन्य निजी इंस्टीट्यूट ने नहीं अपनाई।
33 छात्रों को दाखिल देने के क्रम में एमआईईटी ने बड़ी चालाकी की और उसकी गलत धारणा थी कि बीओपीईई इनके अनियमित प्रवेश को मंजूरी दे देगा।
एमआईईटी के शिकार हुए छात्र
खंडपीठ ने कहा कि भले ही खाली सीटों के लिए एमआईईटी ने नियमों की अवहेलना की और अभी भी 31 सीटें खाली हैं, लेकिन किसी निजी संस्थान को अधिकार नहीं है कि वह नियमों के खिलाफ दाखिला ले।
तमाम दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में सबसे दुखद पहलू 33 छात्र रहे, जिन्हें एमआईईटी के गलत ढंग के दाखिले का शिकार होना पड़ा।
इन छात्रों को दाखिल देने की प्रक्रिया से आधारहीन उम्मीदें बनीं और उनका समय व पैसा बर्बाद हुआ। ट्रायल कोर्ट ने छात्रों को एमआईईटी से मुआवजा पाने का दावा करने की अनुमति दी।
इसलिए एमआईईटी सभी छात्रों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा दे। साथ ही दाखिले के दौरान जमा की गई तमाम तरह की फीस भी लौटाए।