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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Uri attack is the result of bolichistan diplomacy of india

पाकिस्तान के बलूचिस्तान पर घिरने की बौखलाहट का नतीजा है उड़ी हमला

Mon, 19 Sep 2016 10:45 AM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 19 Sep 2016 10:45 AM IST
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Uri attack is the result of bolichistan diplomacy of india
uri - फोटो : PTI
उड़ी फिदायीन हमले में मारे गए चारों आतंकियों के पाकिस्तानी होने सेे पाकिस्तान का चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। अगस्त के महीने से ही एलओसी पर पाक की साजिश के तहत हमलों में तेजी आई है। इनमें पाकिस्तानी आर्मी का बैट दस्ता भी शामिल रहा।
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जम्मू सेंट्रल यूनिवर्सिटी के नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के असिस्टेंट प्रोफेसर जे जगन्नाथन का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बलूचिस्तान और पीओके का मुद्दा उठाए जाने के बाद पाक की बौखलाहट बढ़ी है। विश्व मंच पर अपने को अलग-थलग पाकर उसने हमलों में तेजी लाने की साजिश रची है ताकि अमेरिका से दूरियां बढ़ने के बाद चीन को अपनी ताकत का अहसास करा सके।  
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जगन्नाथन का कहना है कि कश्मीर हिंसा की वजह से आतंकी तंजीमों ने रणनीति बदली है। सुरक्षा बलों पर और अधिक हमले करने की साजिश के तहत वे काम कर रहे हैं। उड़ी का हमला पठानकोट के हमले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि पाकिस्तान इस समय अपने आपको चारों ओर से घिरा महसूस कर रहा है। 
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​भीड़ में शामिल होकर होकर आतंकी सेना पर कर रहे हैं हमला

Uri attack is the result of bolichistan diplomacy of india
Voilance in Kashmir - फोटो : PTI
सरकार को अपनी विदेश नीति तथा सुरक्षा नीति पर पुनर्विचार करना होगा। समय है कि पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाए अन्यथा रियासत में 90 के दशक के हालात पैदा होने की आशंका है। कहा कि कश्मीर हिंसा की आड़ में ही आतंकियों ने सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाना शुरू किया है।

भीड़ में शामिल होकर उन पर हमले किए जा रहे हैं। उद्देश्य सुरक्षा बलों को उकसाना है ताकि उनकी जवाबी कार्रवाई में जान-माल का नुकसान हो और अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर में मानवाधिकार हनन का मामला उठाया जा सके। 
 

इस साल कई बार निशाने पर आये सुरक्षाबल

Uri attack is the result of bolichistan diplomacy of india
uri - फोटो : PTI
इस वर्ष का यह दूसरा सबसे बड़ा फिदायीन हमला है। 25 जून को पांपोर में दो फिदायीन ने सीआरपीएफ काफिले पर हमला किया था, जिसमें आठ जवान शहीद हो गए थे और 20 घायल हुए थे।

वर्ष 2015 में कठुआ, सांबा, कुपवाड़ा, अनंतनाग और पुलवामा में हुए छह फिदायीन हमलों में 13 आतंकी मारे गए थे। तीन सुरक्षा बलों के जवान शहीद हुए थे, जबकि नागरिकों की मौत हुई थी। कुल 29 लोग घायल हुए थे। 
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