कारगिल युद्ध के महानायक: शहीदी दिवस पर परमवीर विक्रम बतरा को द्रास में दी श्रद्धांजलि, वंदे मातरम के नारों से गूंजा लद्दाख
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद की कारगिल-द्रास यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 559 जांबाज ऑफिसर एवं जवानों को याद करना है। परमवीर चक्र विजेता शहीद विक्रम बतरा की 23वीं पुण्यतिथि पर वीरवार को द्रास स्थित बतरा मेमोरियल पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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कारगिल युद्ध के महानायक एवं परमवीर चक्र विजेता शहीद विक्रम बतरा की 23वीं पुण्यतिथि पर वीरवार को द्रास स्थित बतरा मेमोरियल पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान विक्रम बतरा की वीरता और अदम्य साहस को याद किया गया। इस दौरान विक्रम बतरा अमर रहे, भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से द्रास सेक्टर गूंज उठा।
559 जांबाज ऑफिसर एवं जवानों को किया याद
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद द्वारा आयोजित कारगिल-द्रास यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 559 जांबाज ऑफिसर एवं जवानों को याद करना है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एयर वाइस मार्शल एचपी सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी, नेवी के कमांडर बनवारी लाल, उधमपुर इकाई के अध्यक्ष मेजर उमाकांत शर्मा, सचिव सार्जेंट यशपाल शर्मा, ऑनरेरी कैप्टन वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में 45 सदस्यीय टीम ने बतरा मेमोरियल पर श्रद्धांजलि दी।
सेना के अदम्य साहस, पराक्रम एवं शौर्य का प्रतिफल
इस दौरान उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे दुर्गम चोटियों पर लड़ा गया यह युद्ध भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम एवं शौर्य का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि तब बिक्रम बतरा की उम्र 24 साल थी, जब उन्होंने 5140 की दुर्गम चोटी को फतह किया था। इसकी वजह से उनके कमान अधिकारी ने उन्हें शेरशाह की उपाधि दी थी। उन्होंने दूसरी दुर्गम चोटी 4875 को भी फतह किया और आखिर में गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण 7 जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त हो गए।
कारगिल-द्रास यात्रा 2022 का आयोजन
भारतीय सेना ने उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया। कारगिल युद्ध के दौरान वह इतनी वीरता से लड़े थे कि दुश्मन की सेना में खलबली मच गई थी। दुश्मन की सेना में भी बिक्रम बतरा शेरशाह के नाम से जाने जाते थे।गौरतलब है कि अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर कारगिल-द्रास यात्रा 2022 का आयोजन किया है। यह यात्रा कारगिल विजय दिवस समारोह के तहत 2011 में भारतीय सेना के सहयोग से शुरू की गई थी। इस यात्रा में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त तीनों सेनाओं के अफसर, जवान एवं मातृशक्ति सम्मिलित होते हैं।