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सड़क होते हुए भी लोग पैदल चलने को मजबूर
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बिलावर। उपमंडल मुख्यालय से सटे कोटी और उसके आसपास के गांवों में लोग यात्री वाहन न चलने से परेशानियों का सामना कर रहे हैं। महंगाई के इस दौर में निजी वाहनों में सफर करना उनके लिए काफी महंगा साबित हो रहा है।
लोगों का कहना है कि सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण किया था। लगभग आठ वर्ष पूर्व बनी इस सड़क से गांव को उपमंडल मुख्यालय से जोड़ा गया था। तब से इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार ने यात्री वाहन नहीं चलाए। सड़क होते हुए भी लोगों को पुराने पैदल रास्तों से उपमंडल मुख्यालय जाना पड़ता है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे उपजिला अस्पताल पहुंचाने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सरकार से मांग है कि नौ किलोमीटर लंबी इस सड़क पर कोई यात्री वाहन चलाया जाए। इससे कोटी, नगर कमेटी के वार्ड 1, काला डबर, लरदेई, बडोला, बरनाल, गलूगट, आदि गांवों को लाभ मिलेगा।
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स्थानीय युवा साहिल सिंह ने कहा कि जो विद्यार्थी कॉलेज और स्कूलों में पढ़ाई करते हैं, उन्हें सबसे अधिक दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। क्योंकि, सड़क पर कोई भी वाहन नहीं चलता।
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जोगेंद्र सिंह ने कहा कि कई लोग हर दिन उपमंडल मुख्यालय की ओर अपने कामों से जाते हैं। सड़क होने के बावजूद यहां यात्री वाहन नहीं चलते। जिससे लोग पैदल सफर करने को मजबूर हैं।
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नरेंद्र खजूरिया ने कहा कि अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी में डालकर सड़क किनारे तक पहुंचाना पड़ता है। उसके बाद निजी वाहन का सहारा लेकर मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है।
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लोगों का कहना है कि सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण किया था। लगभग आठ वर्ष पूर्व बनी इस सड़क से गांव को उपमंडल मुख्यालय से जोड़ा गया था। तब से इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार ने यात्री वाहन नहीं चलाए। सड़क होते हुए भी लोगों को पुराने पैदल रास्तों से उपमंडल मुख्यालय जाना पड़ता है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे उपजिला अस्पताल पहुंचाने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सरकार से मांग है कि नौ किलोमीटर लंबी इस सड़क पर कोई यात्री वाहन चलाया जाए। इससे कोटी, नगर कमेटी के वार्ड 1, काला डबर, लरदेई, बडोला, बरनाल, गलूगट, आदि गांवों को लाभ मिलेगा।
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स्थानीय युवा साहिल सिंह ने कहा कि जो विद्यार्थी कॉलेज और स्कूलों में पढ़ाई करते हैं, उन्हें सबसे अधिक दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। क्योंकि, सड़क पर कोई भी वाहन नहीं चलता।
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जोगेंद्र सिंह ने कहा कि कई लोग हर दिन उपमंडल मुख्यालय की ओर अपने कामों से जाते हैं। सड़क होने के बावजूद यहां यात्री वाहन नहीं चलते। जिससे लोग पैदल सफर करने को मजबूर हैं।
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नरेंद्र खजूरिया ने कहा कि अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी में डालकर सड़क किनारे तक पहुंचाना पड़ता है। उसके बाद निजी वाहन का सहारा लेकर मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है।