'कश्मीर के विलय पर सवाल उठाने वाले पार्टियों के मुंह पर बड़ा तमाचा'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरफेसी कानून के संबंध में रियासत के लिए दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। इनका कहना है कि इस फैसले से विलय को लेकर समय-समय पर उठ रहे विवादों का पटाक्षेप होगा। फैसला कश्मीर आधारित पार्टियों के मुंह पर करारा तमाचा है जो लगातार विलय पर सवाल उठाते रहे हैं।
पैंथर्स पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री हर्षदेव सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि जम्मू-कश्मीर हिंदुस्तान का अभिन्न हिस्सा है। विलय को आधा अधूरा बताकर विवाद पैदा करने वाली कश्मीर आधारित पार्टियों के मुंह पर करारा तमाचा है।
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को भारत का अंग न बताने वालों को भी फैसले से करारा जवाब मिला है। इस फैसले का व्यापक असर पड़ेगा।
भाजपा ने किया फैसले का स्वागत
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हर वह कानून जो केंद्र सरकार द्वारा पारित किया जाता है उसे यहां लागू करने की दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए। इस फैसले से भारत की संप्रुभता पर सवालिया निशान उठाने वालों को मुंह की खानी पड़ी है। कुछ लोग मात्र न्यूज में रहने के लिए अनर्गल प्रलाप करते हैं। ऐसे लोगों की फैसले से बोलती बंद हो गई है।
कांग्रेस के प्रवक्ता रवींद्र शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है उसे राज्य में मान्य करना होगा। इस फैसले से राज्य के विशेष दर्जे को किसी प्रकार का नुकसान होता नहीं दिख रहा है। क्योंकि बैंक अपने लोन की वसूली के लिए जिन संपत्तियों की नीलामी करेगा उसे राज्य के लोगों को ही देना होगा। नान स्टेट सब्जेक्ट वाले यहां संपत्ति खरीद नहीं सकते।
अनुच्छेद 370 को कमजोर कर रही सरकार: उमर
इससे साफ है कि रियासती सरकार ने कमजोर लीगल डिफेंस पेश किया और अनुच्छेद 370 को लगातार कमजोर करने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार से कहा है कि वह इस मामले पर अपना पक्ष रखे।