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ब्लैक डे के मद्देनजर कश्मीर में सुरक्षा सख्त, मोबाइल सेवा ठप

Wed, 20 Jul 2016 12:41 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Wed, 20 Jul 2016 12:41 AM IST
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tight security in kashmir
कश्मीर में सुरक्षा कड़ी - फोटो : PTI
काजीगुंड फायरिंग में बीती शाम जख्मी हुई एक और महिला नीलोफर ने दम तोड़ दिया। इस घटना में मरने वालों की कुल तादाद तीन हो गई है। गुस्साए लोगों ने तीनों शव सड़क पर रखकर सेना के खिलाफ प्रदर्शन किया। कश्मीर के सभी जिलों में कर्फ्यू जारी है।
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अलगाववादियों द्वारा 20 जुलाई को काला दिवस मनाने की घोषणा के मद्देनजर सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। काला दिवस के विरोध में जम्मू संभाग में कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए। मोबाइल इंटरनेट तथा रेल सेवाएं 12 दिन से ठप हैं। बीएसएनएल को छोड़कर अन्य सभी मोबाइल कंपनियों की सेवाएं ठप हैं।  
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सेना ने खेद जताया, जांच के आदेश
सेना ने काजीगुंड फायरिंग की घटना पर खेद जताते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। सेना ने घटना को दुखद बताते हुए मृतकों तथा घायलों के परिवारवालों को हरसंभव सहायता देने की घोषणा की है।
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फायरिंग में तीन लोगों की मौत और छह अन्य के घायल होने पर सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि सेना के वाहन पर भीड़ के हमले, पथराव तथा हथियार छीनने की कोशिश के बाद मजबूरन फायरिंग करनी पड़ी।

घाटी में अखबार कल भी नहीं

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kashmir protest - फोटो : PTI
प्रवक्ता ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा सेना के वाहनों और ठिकानों पर पथराव न करने की अपील की है। साथ ही यह भी कहा है कि ऐसे हालात पैदा न किए जाएं जिसमें आत्मरक्षार्थ फायरिंग के अलावा कोई विकल्प न बचे। काजीगुंड में रोड ब्लाक हटाने के दौरान भीड़ ने दो ओर से पथराव किया। हथियार छीनने की कोशिश के साथ ही वाहन फूंकने का प्रयास किया। कई बार चेतावनी देने के बाद भी
भीड़ नहीं हटी तो फायरिंग के लिए मजबूर होना पड़ा।

वेंकैया ने महबूबा से बात की
केंद्रीय संचार मंत्री एम वेंकैया नायडू ने सोमवार की रात मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात कर कश्मीर के हालात की जानकारी ली। महबूबा ने उन्हें बताया कि अखबारों के प्रकाशन पर बैन लगाने का सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया था।

घाटी में अखबारों का प्रकाशन करने से अखबार मालिकों ने इनकार कर दिया है। घाटी में 16 जुलाई से अखबार नहीं छप रहे हैं। कश्मीर लाइफ के एडिटर इन चीफ मसूद मुंतज्जर का कहना है कि बुधवार को बैठक कर अखबार छापने के बारे में फैसला किया जाएगा।

यह सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से किया गया है। अखबार संचालक कठपुतली नहीं हैं। सरकार की ओर से बैन हटाए जाने का लिखित आदेश मिलना चाहिए। 
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