अपने बच्चों को जरूर पिलाएं दो बूंद जिंदगी की
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रियासत में तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान 18 जनवरी से शुरू होगा। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख संभाग में पांच साल तक के करीब साढ़े उन्नीस लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। बर्फबारी वाले इलाकों और पाक गोलाबारी से प्रभावित सीमांत बच्चों के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। विस्थापित आबादी पर भी पूरी तरह ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
पहले दिन बूथों और इसके बाद दो दिन घर-घर जाकर दो बूंद जिंदगी के पिलाए जाएंगे। परिवार कल्याण विभाग जेएंडके के निदेशक डा. बलदेव राज शर्मा का कहना है कि पल्स पोलियो अभियान की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बर्फबारी से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में अभियान बढ़ाने का प्रावधान रहेगा।
पल्स पोलियो में डोर टू डोर अभियान में ईंट भट्ठों, झुग्गी झोपड़ी, विस्थापित गुज्जर बक्करवालों, निर्माण स्थलों और सड़क किनारे बसे श्रमिकों के बच्चों को कवर किया जाएगा। रियासत में अब तक आए अधिकांश पोलियो के मामले दूसरे राज्यों से यहां तक पहुंचे हैं।
इस बार अभियान में जम्मू डिवीजन में 8,66,749 और कश्मीर डिवीजन में 10,83,881 बच्चों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जम्मू डिवीजन में 5,528 और कश्मीर में 5,877 बूथ स्थापित किए जाएंगे। अभियान के दौरान जम्मू डिवीजन में 197 और कश्मीर में 101 ट्रांजिट टीमें काम करेंगी।
ट्रांजिट टीमें अलग से बस स्टैंड, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन सहित अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले बच्चों को कवर करेंगी। बक्करवाल, खानाबदोश बच्चों के लिए जम्मू डिवीजन में 231 और कश्मीर में 83 मोबाइल टीमें बनाई गई हैं।
पांच बूथों पर एक सुपरवाइजर
हर पांच बूथों पर एक सुपरवाइजर रहेगा। अभियान निर्धारित तिथि को सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक जारी रहेगा। अभियान को सफल बनाने के लिए कश्मीर डिवीजन में 22,638 और कश्मीर (लेह और कारगिल भी शामिल) में 22,526 चिकित्सा कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके अतिरिक्त जम्मू डिवीजन में 1,112 और कश्मीर में 1,177 सुपरवाइजर काम करेंगे।
वर्ष 2010 में आया था एक मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2010 में देश भर में 41 नए पल्स पोलियो के मामले सामने आए थे। इनमें जम्मू का एक मामला भी शामिल था। यह मामला बाहरी राज्य से यहां तक पहुंचा। बाजीगर बस्ती में एक खानाबदोश परिवार से संबंधित बच्चे में पोलियो की शिकायत पाई गई। वर्ष 2002 से लेकर 2010 तक राज्य में सिर्फ तीन ही पल्स पोलियो के मामले पकड़े गए हैं। लेकिन ये सभी मामले बाहरी राज्यों से यहां तक पहुंचे। इनमें स्थानीय कोई मामला नहीं था।