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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Three attacks in one year in Poonch all three have same method Not one terrorist killed 10 soldiers sacrificed

खुफिया तंत्र में बड़ी कमी: पुंछ में एक साल में तीन हमले, तीनों का तरीका एक; नहीं मरा एक आतंकी, 10 जवान बलिदान

Tue, 07 May 2024 06:12 PM IST
Vikas Kumar अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 07 May 2024 06:12 PM IST
सार

जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का मानना है कि खुफिया तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी कमी है। जो आतंकियों की मौजूदगी का पता नहीं लगा पा रहे। सूत्रों का कहना है कि पुंछ के जंगलों में 15 से 20 आतंकियों का दल मौजूद हैं।

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Three attacks in one year in Poonch all three have same method Not one terrorist killed 10 soldiers sacrificed
चंद मिनट में ही हमला कर गायब हो जाते हैं आतंकी, एक वर्ष में ही एक तरह के तीन हमले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुंछ के सुरनकोट में वायुसेना के सैनिकों पर हुए हमले ने खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा कर दी है। पुंछ में पिछले एक वर्ष में इस तरह का यह तीसरा हमला है और तीनों ही हमलों में एक भी आतंकी नहीं मारा गया। न ही इन आतंकियों का कुछ पता चला। जहां तक कि हमलों में 10 जवान बलिदान हो गए। हैरानी की बात तो यह है कि तीनों हमलों को एक ही तरीके से अंजाम दिया गया। 

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जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का मानना है कि खुफिया तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी कमी है। जो आतंकियों की मौजूदगी का पता नहीं लगा पा रहे। सूत्रों का कहना है कि पुंछ के जंगलों में 15 से 20 आतंकियों का दल मौजूद हैं। इसमें पाकिस्तानी सेना के रिटायर कमांडो तक शामिल हैं। इनकी मूवमेंट लगातार इस पार उस पार लगी हुई है।

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जानकारी के अनुसार 20 अप्रैल 2023 को पुंछ के भाटादुड़ियां के पास आतंकियों ने दोनों तरफ से एक सैन्य ट्रक को घेर लिया। वाहन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इसमें पांच जवान बलिदान हो गए। ठीक सात महीनों के बाद 2023 में 22 दिसंबर को पुंछ के ही बफलियाज में सैन्य वाहनों को दोनों तरफ घेरकर हमला किया गया। इसमें चार जवान बलिदान हो गए। अब तीसरा हमला फिर वैसे ही वायुसेना के जवानों पर किया गया है। इसमें एक जवान बलिदान हो गया।

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हमले करने की एक जैसी ही रणनीति
पुंछ में सैन्य वाहनों को निशाना बनाकर हमला करने की रणनीति एक जैसी ही है। आतंकी हमला करने के लिए शाम का वक्त चुनते हैं या फिर खराब मौसम को। क्योंकि हमला करने के बाद रात के समय में इनका पता लगाना मुश्किल होता है। हमला करने के बाद वह ऐसे रूट का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी पहले ही उन्होंने दर्जनों बार रेकी की होती है। वह हमला करने के लिए इन रूट का इस्तेमाल करते हैं।

पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि लगातार हमले होना खुफिया तंत्र की कमी है। चूक तो हो रही है, क्योंकि हम आतंकियों की मौजूदगी का पता नहीं लगा पा रहे। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए खुफिया तंत्र को सक्रियता से काम करना होगा। साथ ही सैन्य वाहनों की मूवमेंट में ड्रोन का इस्तेमाल या फिर दूसरे तकनीकी बंदोबस्त की मदद लेनी चाहिए।

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