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जम्मू कश्मीर में सूखे की आहट, किसानो में चिंता

Sun, 18 Dec 2016 03:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 18 Dec 2016 03:43 PM IST
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threats of drought in jammu and kashmir makes troubles for farmers
रियासत में सूखे की आहट से किसान सहमें - फोटो : फाइल फोटो

रियासत में सूखे की आहट से किसान सहम गए हैं। जम्मू संभाग में दो महीने से बारिश नहीं हुई। इसकी वजह से रबी फसलों पर सूखे का संकट पैदा हो गया है। किसी तरह से गेहूं की बिजाई तो कर दी गई है। लेकिन नमी न होने से गेहूं अंकुरित नहीं हो पा रहा। यही नहीं, कश्मीर संभाग में भी सामान्य से कम बारिश हुई है। 

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 पिछले कुछ सालों में गुलमर्ग, पहलगाम, श्रीनगर जैसे ठंडे इलाकों में बारिश/बर्फबारी सामान्य से कम हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ों पर पर्याप्त बर्फबारी न होने से जमीनी स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग का भी खतरा बढ़ता है। इसका पर्यावरण के साथ कृषि पर भी गहरा असर पड़ता है। 
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जम्मू संभाग में इस समय साढ़े तीन लाख हेक्टेयर पर गेहूं की बिजाई की गई है। इसमें दो लाख हेक्टेयर सिर्फ जम्मू, सांबा और कठुआ तीन जिलों का ही है। जम्मू, सांबा और कठुआ में सिर्फ 60 हजार हेक्टेयर पर प्रताप और रणवीर का पानी पहुंचता है। जबकि इन तीन जिलों को छोड़ कर जम्मू संभाग के बाकी सभी जिलों में बारिश के पानी पर फसल निर्भर करती है। 

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दो महीने से नहीं हुई बारिश

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दो महीने से नहीं हुई बारिश - फोटो : अमर उजाला

जम्मू में रणवीर 40 और कठुआ में प्रताप 20 हजार का एरिया कवर करती है। लेकिन पिछले दो महीने से बारिश नहीं हुई है।  वहीं मौसम विभाग श्रीनगर के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पिछले कुछ वर्षों में घाटी में दिसंबर माह में सामान्य से कम बारिश/बर्फबारी हुई है।

वर्ष 2013 में श्रीनगर में सिर्फ 16.6 (बारिश/बर्फबारी, सामान्य 59.6 मिलीमीटर) ही हुई, जो सामान्य से कई गुणा कम थी। हालांकि पहलगाम में 96.2 (सामान्य 81.5) और गुलमर्ग में 33.8 मिलीमीटर ( सामान्य 139.4) थी।

इसी तरह वर्ष 2014 में श्रीनगर और पहलगाम दिसंबर में ड्राई रहे, पहलगाम में सिर्फ 1.6 मिलीमीटर ही बारिश/बर्फबारी हुई। वर्ष 2015 नें श्रीनगर में 23.2 गुलमर्ग में 52.6 और पहलगाम में सिर्फ 29.8 मिलीमीटर बारिश/बर्फबारी हुई। 

अगले माह तक हो सकती है बर्फबारी

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घाटी में बर्फबारी - फोटो : Amar Ujala

वर्ष 2016 में 16 दिसंबर तक श्रीनगर में 2.4, पहलगाम में 7.4 और पहलगाम में 2.2 बारिश/बर्फबारी दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञ यशपाल शर्मा के अनुसार कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के चलते सूखे का स्तर बढ़ा है।

रियासत में प्रशांत महासागर केसपियन (इरान, इराक के पास), मेडिटेरियन ( अफगानिस्तान के पास) और ब्लैक समुद्र (प्रशांत महासागर) से हवाएं उठकर पश्चिमी विक्षोभ बनाती हैं। लेकिन समुद्र तल से ऊपर की सतह में तापमान के असंतुलित रहने के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है।

हालांकि रियासत में आगामी माह में बर्फबारी हो सकती है। लेकिन पिछले आंकड़ों के मुताबिक ज्यादा असर नहीं दिख सकता है। कम बर्फबारी से जलस्तर घटने से पेयजल समस्या के साथ पर्यावरण पर असर पड़ता है। जमीनी सतह गर्म होने से ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की आशंका बढ़ जाती है। 

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