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नई औद्योगिक नीति पर पुनर्विचार करेगी राज्य सरकार
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Thu, 12 May 2016 07:53 PM IST
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
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राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति पर पुनर्विचार करेगी। इस नीति को राज्यपाल शासन के दौरान मंजूरी दी गई थी। यह घोषणा राज्य सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने की।
उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सरकार ने उद्योग नीति को अधिक विस्तृत तथा जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति के साथ समझौता किए बिना इसे दोबारा तैयार करने का फैसला किया है।
जम्मू कश्मीर में बागवानी, औषधीय पौधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए इन्हें उद्योग के तौर पर विकसित करने की आवश्यकता है। कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी हुई सरकार के कारण हमें लोगों के एक बड़े वर्ग तथा राज्य के भागीदारों की अपेक्षाओं का भी ध्यान रखना है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को उद्योग नीति पर पुनर्विचार करने के लिए इसे दोबारा मंत्रिमंडल के समक्ष रखने को कहा है।
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कहा कि इसे अंतिम रूप देने से पहले भागीदारों के साथ सलाह-मशविरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई उद्योग नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के उद्योग क्षेत्र में नई जान डालना होगा जिससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि विस्तृत औद्योगिक गतिविधियों से राज्य आर्थिक विकास के मार्ग पर प्रशस्त होगा।
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उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सरकार ने उद्योग नीति को अधिक विस्तृत तथा जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति के साथ समझौता किए बिना इसे दोबारा तैयार करने का फैसला किया है।
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जम्मू कश्मीर में बागवानी, औषधीय पौधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए इन्हें उद्योग के तौर पर विकसित करने की आवश्यकता है। कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी हुई सरकार के कारण हमें लोगों के एक बड़े वर्ग तथा राज्य के भागीदारों की अपेक्षाओं का भी ध्यान रखना है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को उद्योग नीति पर पुनर्विचार करने के लिए इसे दोबारा मंत्रिमंडल के समक्ष रखने को कहा है।
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कहा कि इसे अंतिम रूप देने से पहले भागीदारों के साथ सलाह-मशविरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई उद्योग नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के उद्योग क्षेत्र में नई जान डालना होगा जिससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि विस्तृत औद्योगिक गतिविधियों से राज्य आर्थिक विकास के मार्ग पर प्रशस्त होगा।
कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी पर सरकार गंभीर
सीएम महबूबा मुफ्ती और डिप्टी सीएम निर्मल सिंह
- फोटो : Amar Ujala
यह पूछे जाने पर कि उद्योगों के लिए नान स्टेट सब्जेक्ट वालों को लीज पर भूमि अधिग्रहण की अनुमति दी जाएगी तो उन्होंने कहा कि राज्य के विशेष दर्जे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। यह कतई संदेश नहीं दिया जाएगा कि हम राज्य के विशेष दर्जे के प्रावधान, इसकी विशेषताओं तथा संवैधानिक स्थिति को कमजोर करना चाहते हैं।
पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने अपने एजेंडा आफ एलायंस में इसका उल्लेख भी किया है और किसी भी कीमत पर विशेष दर्जे को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
ज्ञात हो कि राज्यपाल शासन में स्वीकृत नई औद्योगिक नीति में इस बात का प्रावधान किया गया है कि राज्य के बाहर के निजी उद्योगपति (नान स्टेट सब्जेक्ट) जेके स्माल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (सिकाप) तथा जेके स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिडको) और राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से जमीन का अधिग्रहण कर सकते हैं। लीज अधिकतम 90 वर्षों के लिए होगी।
कश्मीरी पंडितों के कंपोजिट कालोनी पर राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी के लिए गंभीर है। वह समाज का हिस्सा बनें यह प्रयास होगा और इस पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने अपने एजेंडा आफ एलायंस में इसका उल्लेख भी किया है और किसी भी कीमत पर विशेष दर्जे को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
ज्ञात हो कि राज्यपाल शासन में स्वीकृत नई औद्योगिक नीति में इस बात का प्रावधान किया गया है कि राज्य के बाहर के निजी उद्योगपति (नान स्टेट सब्जेक्ट) जेके स्माल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (सिकाप) तथा जेके स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिडको) और राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से जमीन का अधिग्रहण कर सकते हैं। लीज अधिकतम 90 वर्षों के लिए होगी।
कश्मीरी पंडितों के कंपोजिट कालोनी पर राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी के लिए गंभीर है। वह समाज का हिस्सा बनें यह प्रयास होगा और इस पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।