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Exclusive: बैन के बावजूद घाटी में वेबसाइट चला रहे आतंकी, देखिए कैसे?

Mon, 01 May 2017 09:22 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रेयांश त्रिपाठी
amarujala.com- Presented by: श्रेयांश त्रिपाठी Updated Mon, 01 May 2017 09:22 PM IST
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terrorist using virtual private network in kashmir
वीपीएन के जरिए इंटरनेट का हो रहा इस्तेमाल - फोटो : डेमो फोटो

कश्मीर घाटी में तनाव के बीच जिन वेबसाइट को बैन किया गया है, उनके इस्तेमाल के लिए अब प्राक्सी साइट का इस्तेमाल किया जाने लगा है। इन वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) की मदद से न सिर्फ बैन किए एप्लीकेशन और वेबसाइट को खोला जा सकता है, बल्कि कुछ हद तक उस कम्प्यूटर की पहचान को भी छिपाया जा सकता है जिनसे ये वेब एड्रेस इस्तेमाल किए जा रहे हैं। 

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रियासती सरकार ने घाटी में हिंसा को रोकने के लिए 22 सोशल नेटवर्किंग साइट पर प्रतिबंध लगाया है। इस प्रतिबंध के बाद भी घाटी के कई हिस्सों पर सोशल नेटवर्किंग की कई साइट का इस्तेमाल किया जा रहा हैं। इन प्रतिबंधित वेबसाइट को खोलने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल हो रहा है। 
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कश्मीर रेंज के आईजी एसजेएम गिलानी ने बताया कि कश्मीर घाटी में प्राक्सी साइट और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल होने की जानकारी मिली है। इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्राक्सी साइट के इस्तेमाल को रोकने के लिए आने वाले दिनों में बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। यह वीडियो वीपीएन के जरिए अपलोड किए जा रहे हैं। तकनीकी विंग यह देख रहा है कि इस पर कैसे नियंत्रण किया जा सकता है।

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घाटी से वायरल हो रहे वीडियो की जांच जारी

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वायरल हो रहे वीडियो की जांच जारी - फोटो : डेमो फोटो
आईजी ने बताया कि कश्मीर घाटी में वायरल हुए वीडियो की जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि इस वीडियो से किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है या नहीं। दक्षिण कश्मीर में आतंकियों की पहचान हो चुकी है। ऐसे में इस बात की भी जांच की जा रही है कि वीडियो में दिख रहे आतंकी कौन हैं।

घाटी में तनाव के कारण 2 हफ्तों तक इंटरनेट बैन को शनिवार को हटाया गया था। हालांकि प्रशासन की ओर से फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, वीचैट, क्यूक्यू, क्यूजोन, गूगल प्लस, स्काइप, लाइन, पिन्टरेस्ट, स्नैपचैट, यू ट्यूब, वाइन और फ्लिकर जैसे 22 एप्लीकेशनों पर लगी रोक को नहीं हटाया गया है।
 

घाटी में बवाल के लिए इस्तेमाल

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कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन - फोटो : फाइल फोटो
इससे पहले कश्मीर घाटी में कई वाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों द्वारा पत्थरबाजों को इकट्टा किया जाता था, जिसके बाद से सरकार ने बुधवार को 22 सोशल नेटवर्किंग साइटों पर एक महीने के लिए रोक लगा दी थी।
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