कश्मीर में समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे आतंकी, बिगड़े घाटी के हालात
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कश्मीर में आतंकी संगठन समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। नक्सलियों की जन अदालतों और आईएस की कार्यशैली की तर्ज पर लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन ने पुलिसकर्मियों और सियासी कार्यकर्ताओं को सजा देना शुरू कर दिया है।
आतंकी खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर दिखने लगे हैं। सेना और सुरक्षा बलों द्वारा मुठभेड़ में आतंकियों को ढेर किए जाने के बाद आतंकी संगठनों द्वारा फायरिंग कर शवों को सैल्यूट देने का सिलसिला चल पड़ा है। सुरक्षा बलों ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए दक्षिणी कश्मीर में व्यापक सर्च अभियान शुरू किया है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के समूह ने शोपियां और त्राल के घने जंगलों में महफूज ठिकाना बना लिया है। आतंकी जंगलों से बाहर आकर आतंकियों की शव यात्रा में शामिल हो रहे हैं और शवों को फायरिंग कर सलामी देने लगे हैं।
आतंक का गढ़ बना दक्षिण कश्मीर
अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां में आतंकियों ने कई घरों में भी शरण ली है। इसलिए व्यापक सर्च अभियान की जरूरत महसूस की गई। बैंकों में लूट कर फंड जमा करने की आतंकियों की रणनीति को नाकाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
पहली बार बड़े पैमाने पर आतंकी सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा बलों को सहयोग करने वाले कश्मीरियों को दंडित करने लगे हैं। दक्षिणी कश्मीर में एक महीने में छह एसपीओ और चार अन्य पुलिसकर्मियों को आतंकियों की ओर से दंडित कर उनका वीडियो बनाकर उसे वायरल किया गया। इनमें से तीन के सिर मुंडवाने का वीडियो वायरल हुआ। इसी तरह पांच सियासी कार्यकर्ताओं को भी सजा दी गई है।
हथियारों के बूते धमका कर मस्जिदों में माफी मंगवाई गई और उसके वीडियो बनाकर अन्य लोगों में दहशत फैलाने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया। शोपियां में लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की अपहरण कर हत्या भी इसी कड़ी का हिस्सा है। आतंकी कश्मीरी युवाओं को सेना और पुलिस की भर्ती रैलियों में शामिल नहीं होने का दबाव भी बना रहे हैं।
पाकिस्तान से अधिक कश्मीरी आतंकी