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हाईकोर्ट ने दिए 7 साल पूरा करने वाले दिहाड़ीदारों को स्थायी करने के आदेश
जेएनएफ/जम्मू
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:01 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo photo
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हाईकोर्ट ने सात साल से सरकारी विभाग में काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को नियमित करने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने ये ऐतिहासिक फैसला पीएचई विभाग में सात साल पूरे कर चुके याचिकाकर्ता स्वर्ण सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।
न्यायाधीश रामलिंगम सुधाकर ने स्वर्ण सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि याची पीएचई विभाग में सात साल पूरा कर चुका है। वह वर्ष 1992 से दैनिक वेतन भोगी है। पर उसे अभी तक नियमित नहीं किया गया। वर्ष 1992 में नियुक्त होने के बावजूद उसकी भर्ती 1996 बताई गई। उसकी 50 फीसदी जमीन कृषि योग्य है।
इस जमीन पर ट्यूबवेल स्थापित करने के लिए 1992 में उसे दिहाड़ीदार नियुक्त किया गया। उसकी जमीन भी मुफ्त में ले ली। उसे एसआरओ 1988 के तहत नियुक्त किया जाना था। चीफ इंजीनियर को आवेदन भी दिया गया। पर आवेदन को रद्द कर दिया गया। चीफ इंजीनियर ने कहा 8 मई, 2002 को पत्र लिखा और कहा कि याची ने अपनी मर्जी से जमीन को दान किया है।
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उसकी कुल जमीन का 50 फीसदी से भी कम हिस्सा लिया गया है। वर्ष 1988 का एसआरओ भी 1991 में रद्द कर दिया था। जमीन का अधिग्रहण 1992 में किया था। इसलिए उसे 1988 के एसआरओ का लाभ नहीं दिया जा सकता है। चीफ इंजीनियर के इस आदेश को याची ने कोर्ट में चुनौती दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार को याची को नियमित करने के आदेश दिए।
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न्यायाधीश रामलिंगम सुधाकर ने स्वर्ण सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि याची पीएचई विभाग में सात साल पूरा कर चुका है। वह वर्ष 1992 से दैनिक वेतन भोगी है। पर उसे अभी तक नियमित नहीं किया गया। वर्ष 1992 में नियुक्त होने के बावजूद उसकी भर्ती 1996 बताई गई। उसकी 50 फीसदी जमीन कृषि योग्य है।
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इस जमीन पर ट्यूबवेल स्थापित करने के लिए 1992 में उसे दिहाड़ीदार नियुक्त किया गया। उसकी जमीन भी मुफ्त में ले ली। उसे एसआरओ 1988 के तहत नियुक्त किया जाना था। चीफ इंजीनियर को आवेदन भी दिया गया। पर आवेदन को रद्द कर दिया गया। चीफ इंजीनियर ने कहा 8 मई, 2002 को पत्र लिखा और कहा कि याची ने अपनी मर्जी से जमीन को दान किया है।
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उसकी कुल जमीन का 50 फीसदी से भी कम हिस्सा लिया गया है। वर्ष 1988 का एसआरओ भी 1991 में रद्द कर दिया था। जमीन का अधिग्रहण 1992 में किया था। इसलिए उसे 1988 के एसआरओ का लाभ नहीं दिया जा सकता है। चीफ इंजीनियर के इस आदेश को याची ने कोर्ट में चुनौती दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार को याची को नियमित करने के आदेश दिए।