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कश्मीर घाटी में 27 वर्षों बाद फिर खुला वैताल भैरव मंदिर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Sun, 01 May 2016 12:57 PM IST
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Ancient Hindu temple
- फोटो : Amar Ujala
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रैनावारी इलाके में वीरवार को 27 वर्षों के बाद वैताल भैरव का मंदिर खुला। देश विदेश से पहुंचे कश्मीरी पंडितों ने पूजा अर्चना की।
इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हुए। इस मौके पर सरकार और अन्य संस्थाओं से मंदिर के कायाकल्प के लिए मदद मांगी गई। रैनावारी के जोजिलंकर मोहल्ले में स्थित इस वैताल भैरव मंदिर में वीरवार को सुबह से ही चहल पहल देखने को मिली। कश्मीरी पंडित और मुसलमान इस पल के गवाह बने।
राज्य के बाहर से आए उत्पल कौल के अनुसार वर्ष 1986 में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। वर्ष 1989 में यह मंदिर उस समय बंद हुआ, जब घाटी में आतंकवाद की शुरूआत हुई। उनके अनुसार तब से मंदिर के द्वार नहीं खुले थे। अब 27 सालों बाद हवन पूजन कर इसे एक बार फिर खोल दिया गया है।
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इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हुए। इस मौके पर सरकार और अन्य संस्थाओं से मंदिर के कायाकल्प के लिए मदद मांगी गई। रैनावारी के जोजिलंकर मोहल्ले में स्थित इस वैताल भैरव मंदिर में वीरवार को सुबह से ही चहल पहल देखने को मिली। कश्मीरी पंडित और मुसलमान इस पल के गवाह बने।
राज्य के बाहर से आए उत्पल कौल के अनुसार वर्ष 1986 में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। वर्ष 1989 में यह मंदिर उस समय बंद हुआ, जब घाटी में आतंकवाद की शुरूआत हुई। उनके अनुसार तब से मंदिर के द्वार नहीं खुले थे। अब 27 सालों बाद हवन पूजन कर इसे एक बार फिर खोल दिया गया है।
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हवन में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया
कश्मीरी पंडितों ने किया मंदिर में हवन पूजन
- फोटो : Amar Ujala
उत्पल के अनुसार इस मंदिर के खुलने पर यहां 90 के दशक से पहले जैसी चहल पहल देखने को मिली। वह वक्त याद आ गया, जो हमने पहले देखे थे। उन्होंने कहा कि अब यहां हर साल पूजा होगी।
हवन में काफी संख्या में कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। उन्हें भी उस समय का अहसास हुआ जब सब एक साथ रहा करते थे। स्थानीय निवासी मोहम्मद याकूब के अनुसार रैनावारी इलाके में ज्यादातर आबादी कश्मीर पंडितों की थी। य
हां मुसलमानों और पंडितों के बीच काफी भाईचारा था। यही वजह है कि एक बार फिर इस मंदिर के खुलने पर इलाके के मुसलमान यहां मौजूद रहे। याकूब ने पहले की तरह सब कुछ सामान्य होने की उम्मीद जताई।
हवन में काफी संख्या में कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। उन्हें भी उस समय का अहसास हुआ जब सब एक साथ रहा करते थे। स्थानीय निवासी मोहम्मद याकूब के अनुसार रैनावारी इलाके में ज्यादातर आबादी कश्मीर पंडितों की थी। य
हां मुसलमानों और पंडितों के बीच काफी भाईचारा था। यही वजह है कि एक बार फिर इस मंदिर के खुलने पर इलाके के मुसलमान यहां मौजूद रहे। याकूब ने पहले की तरह सब कुछ सामान्य होने की उम्मीद जताई।