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जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे पर खतरा बरकरार, अदालत को सुनवाई टालने के बजाए कर देना चाहिए खारिज

Mon, 06 Aug 2018 08:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 06 Aug 2018 08:16 PM IST
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supreme court should reject the case against 35a instead of next hearing on the case
- फोटो : बासित जरगर
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को मजबूत करने वाले अनुच्छेद 35-ए की सुनवाई को 27 अगस्त तक टाल देने से राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां नाखुश दिख रही हैं। नेशनल कांफ्रेंस का कहना है कि राज्य को विशेष दर्जे को खतरा अगली सुनवाई तक बरकरार है। वहीं पीडीपी के अनुसार इस याचिका को खारिज ही कर देना चाहिए था।
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नेकां के प्रवक्ता जुनैद मट्टू ने बताया कि 35-ए की सुनवाई को आगे टाल देने से कोई नतीजा निकला नहीं। उन्होंने कहा कि अब इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधानिक खंडपीठ के सामने पेश किया जाएगा। ऐसे मामलों में जो भी उनका फैसला होता है, उसे फाइनल माना जाता है। इसलिए जो खतरा सियासी ताकतों की वजह से रियासत के विशेष दर्जे पर था, वह बरकरार है। जुनैद ने कहा कि नेकां ने भी इस मामले में याचिका दायर की है। हमारे वकीलों की टीम भी इसका बचाव कर रही है और करती रहेगी। 
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इस मामले की जमीनी स्थिति पर बताया कि किस तरह से लोगों ने मुकम्मल हड़ताल की। जम्मू से भी समर्थन मिला। राजनीती को एक तरफ रखते हुए जिस तरह से सब एकजुट हुए, उससे उन सियासी ताकतों तक यह संदेश पहुंच जाना चाहिए कि रियासत के तीनों खित्तों के लोग 35-ए के समर्थन में एकजुट हैं। 
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अलगाववादियों की विचारधारा के सवाल पर जुनैद ने कहा कि हुर्रियत और हमारी मानसिकता में बहुत अंतर है। वह नहीं मानते कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य भारतीय संविधान के दायरे में है, लेकिन हम मानते हैं कि हमारा भविष्य संविधान के दायरे में है। 

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता रफी मीर ने कहा कि हम यह उम्मीद करते थे कि आज ही इस मामले की सुनवाई होगी और 35-ए को हटाने की जो याचिका दायर की गयी है, उसे खारिज किया जाएगा। फिलहाल 27 अगस्त तक सुनवाई टालने से अस्थाई रूप से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। क्योंकि सारी जनता एहतिजाज पर थी। मीर ने यह भी कहा कि जब तक हमारे हक में फैसला नहीं आता, तब तक इसके लिए कानूनी और सियासी जंग लड़ने की जरूरत है। पीडीपी द्वारा चलाये जा रहे कानूनी दांवपेंच पर मीर ने कहा कि हम जब हुकूमत में थे, तब हमने अपने एडवोकेट जनरल को इस पर कार्यवाही तेज करने को कहा था, साथ ही दिल्ली में कानूनी महारथियों से भी सलाह ली थी और कुछ दस्तावेज तैयार किये थे। लेकिन सरकार टूटने के बाद वह कार्यवाही आगे चली या नहीं यह पता नहीं। लेकिन हमारे कानूनी माहिर संपर्क में है। 


मामले को टालने से कोई बात बनी नहीं
कांग्रेस के नेता गुलाम नबी मोंगा ने कहा इस मामले को टालने से कोई बात बनती नहीं। उन्होंने कहा कि जिस एनजीओ ने याचिका दायर किया है, इस वो देश का भला नहीं चाहते। इससे पूरे देश में आग लग जाएगी। मोंगा ने कहा कि उस समय के कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से बातचीत कर विलय के बाद इस कानून को शामिल किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही इस कानून को संविधान में शामिल किया है। जाहिर बात है, हम इसका हमेशा बचाव करेंगे।
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