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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Supreme Court: Eligible personnel serving on sanctioned posts are entitled to regularization

सुप्रीम सुनवाई: स्वीकृत पदों पर सेवारत योग्य कर्मी नियमितीकरण का हकदार, जम्मू-कश्मीर परिवहन विभाग के  मामले में सुनवाई   

Sun, 08 May 2022 05:28 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 08 May 2022 05:28 PM IST
सार

सर्वोच्च अदालत ने जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज (स्पेशल प्रोवीजंस) अधिनियम 2010 के तहत रिट कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट के आदेश को परिवहन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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Supreme Court: Eligible personnel serving on sanctioned posts are entitled to regularization
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

परिवहन विभाग में अस्थायी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट की ओर से नियमित करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि अस्थायी नियुक्ति यदि स्वीकृत पद पर हुई है और सात वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाला कर्मी उस पद से संबंधित योग्यता रखता है तो वह नियमितीकरण का हकदार है।

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सर्वोच्च अदालत ने जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज (स्पेशल प्रोवीजंस) अधिनियम 2010 के तहत रिट कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट के आदेश को परिवहन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एमआर शाह और बीवी नागरथना की खंडपीठ ने परिवहन विभाग और कर्मचारियों के वकीलों का पक्ष सुनने के बाद अपील को खारिज कर दिया।
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कोर्ट ने पाया कि संबंधित अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत पदों पर यदि अस्थायी नियुक्ति की गई है और तैनात कर्मी के पास उस पद के लिए निर्धारित योग्यता है। उसने सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है तो वह नियमितीकरण का हकदार है।
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हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अस्थायी कर्मी का कार्यकाल सात वर्ष से अधिक हो गया है, तब भी उसका नियमित सेवाकाल स्थायी नियुक्ति होने के दिन से ही माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले का रिकॉर्ड स्पष्ट कर रहा है कि याची कर्मचारी स्वीकृत पदों पर ही सेवाएं दे रहे हैं और वे सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। अधिनियम के प्रावधानों को देखते हुए हाईकोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है। जेएनएफ

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