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कश्मीर हिंसा पर बीजेपी का रुख साफ, पत्थरबाजों पर कोई रियायत नहीं

Sun, 23 Apr 2017 10:51 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/डोडा
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/डोडा Updated Sun, 23 Apr 2017 10:51 AM IST
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Strong Action taken on stone pelters in kashmir:BJP
घाटी में सुरक्षाबलों पर पथराव करते युवक - फोटो : File Photo
भाजपा अब पीडीपी से तकरार बढ़ाना नहीं चाहती है, लेकिन उपद्रवियों को कोई रियायत देने के मूड में भी नहीं है। भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने आए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यकारिणी ने गठबंधन सरकार पर खतरे की अटकलों पर विराम लगा दिया है।
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अमर उजाला से बातचीत में खन्ना और प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि कश्मीर में शांति बहाली के लिए भाजपा और पीडीपी मिलकर काम कर रही हैं और यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। सुरक्षा बलों पर पथराव का किसी भी तरह समर्थन नहीं किया जा सकता।
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सेना सबको सुरक्षा देती है, इसलिए वह सम्मान की हकदार है। पत्थरबाजी पर तत्काल रोक जरूरी है, ताकि टूरिस्ट सीजन में कश्मीर में रोजगार बढ़ सके और कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
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पीडीपी से खटास भरे रिश्तों के बीच शुरू हुई भाजपा की राज्य कार्यकारिणी पत्थरबाजों को कोई रियायत देने के पक्ष में नहीं है। भाजपा नेताओं का मानना है कि अमन बहाली कश्मीर और राष्ट्र के हित में सर्वाधिक जरूरी है।

Strong Action taken on stone pelters in kashmir:BJP
दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन करते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष - फोटो : Amar Ujala
वहीं कार्यकारिणी के लिए तैयार किए गए सियासी प्रस्ताव में पत्थरबाजों की कड़े शब्दों में निंदा को भी शामिल किया गया है। निंदा प्रस्ताव रविवार को पेश किया जाएगा और उसी दिन इसे पारित कराया जाएगा। तैयार प्रस्ताव कहता है कि सेना और सुरक्षा बलों पर कश्मीर के युवाओं द्वारा पत्थरबाजी निंदनीय है। सेना और सुरक्षा बल पत्थरबाजों तो अपने ही देश के नागरिक हैं, उनसे निपटने में संयम बरत रही है लेकिन इसे सुरक्षा बलों की कमजोरी नहीं समझा जाए।

गौरतलब है कि भाजपा मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा द्वारा पत्थरबाजों के लिए गोली को एकमात्र विकल्प बताए जाने के बाद सियासी बवाल खड़ा हुआ था और पीडीपी खुलकर भाजपा के विरोध में खड़ी होती दिखी। गठबंधन सरकार के दोनों घटक दलों में तनातनी की स्थिति पैदा हुई।

पीडीपी भी कश्मीर केंद्रित दल है और इस दल के भी कुछ नेता पत्थरबाजों का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन भाजपा के प्रस्ताव में नेशनल कांफ्रेंस का नाम लिए बगैर फारूक अब्दुल्ला द्वारा पत्थरबाजों के समर्थन में दिए बयानों की निंदा की गई है। केंद्रित सियासी दलों में अलगाववाद को प्रोत्साहन देने के लिए जारी प्रतियोगिता को भी भाजपा ने आड़े हाथों लिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कश्मीर केंद्रित दल राष्ट्रीय अखंडता से खिलवाड़ कर रहे हैं। 

राज्य कार्यकारिणी सियासी प्रस्ताव के जरिये सिविल सोसाइटी और बुद्धिजीवियों से रचनात्मक भूमिका अदा करने का प्रस्ताव भी पारित करेगी, ताकि अमन बहाल हो सके और विकास को गति दी जा सके। प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों में जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को बधाई भी दी जाने वाली है। इसके साथ जीएसटी पारित कराने, नाशरी-चिनैनी टनल के उद्घाटन के लिए भी केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया जाएगा।
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