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महिलाएं क्यों पहुंचीं सलाखों के पीछे?
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 08 Dec 2014 10:38 PM IST
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जेलों में बंद महिलाएं हवालात कैसे पहुंचीं। किन कारणों ने उन्हें अपराधी बनने पर मजबूर कर दिया। इसका पता लगाने के लिए राज्य महिला आयोग ने एक अनोखी पहल करने की योजना बनाई है। आयोग की टीम जेलों में बंद महिला कैदियों के पास पहुंचेगा और उनका हालचाल पूछेगा।
जेलों में बंद महिला कैदियों के बारे जानकारी जुटाई जाएगी। देखा जाएगा कि जेलों में कितनी महिला कैदी बंद हैं और किन-किन अपराध को लेकर वे सजा काट रही हैं। महिला कैदी दोबारा अपराधी न बनें, इसलिए उनको कांउसिलिंग भी दी जाएगी।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शमीमा फिरदोस ने बताया कि आयोग चाहता है कि जेलों में बंद महिलाओं को किसी प्रकार की कोई दिक्कत पेश न आए। देखा जाएगा कि क्या जेलों में उनको कोई परेशानी तो नहीं।
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यह जानने की कोशिश की जाएगी कि किन हालातों में वे हवालात पहुंचीं। यदि आयोग को लगा कि कोई महिला कैदी निर्दोष है और उसको रिहा कराना चाहिए, तो उसके लिए लड़ाई भी लड़ी जाएगी। आयोग महिलाओं को काउंसिलिंग देगा।
इसमें महिलाओं को दोबारा ऐसी घटनाओं से बचने की नसीहत दी जाएगी, ताकि वेे दोबारा हवालात न पहुंचें। महिला कैदियों को यह भी बताया जाएगा कि वे अन्य महिलाओं को भी जागरूक करें। आयोग का मानना है कि महिलाएं जानबूझ कर अपराध नहीं करतीं। उनको हालात अपराधी बना देते हैं। इसलिए ऐसे हालातों का सामना करने के लिए आयोग महिला कैदियों में जान फूंकेगा।
तारीख पे तारीख
जेलों में बंद महिला कैदियों को तारीख पे तारीख मिलती है। कई महिला कैदियों के कई साल तक चालान नहीं पेश किए जाते। इसकी वजह से उनको लंबे समय तक जेलों में अपनी जिंदगी काटनी पड़ती है। इस पर भी आयोग कड़ा संज्ञान लेगा।
अध्यक्ष शमीमा फिरदोस का कहना है कि वह गृह और पुलिस विभाग से अपील करेगा कि महिला कैदियों के चालान पेश होने में देरी न हो। उनके चालान तुरंत पेश हों, ताकि उनको सजा की अवधि लंबी न काटनी पड़े।
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जेलों में बंद महिला कैदियों के बारे जानकारी जुटाई जाएगी। देखा जाएगा कि जेलों में कितनी महिला कैदी बंद हैं और किन-किन अपराध को लेकर वे सजा काट रही हैं। महिला कैदी दोबारा अपराधी न बनें, इसलिए उनको कांउसिलिंग भी दी जाएगी।
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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शमीमा फिरदोस ने बताया कि आयोग चाहता है कि जेलों में बंद महिलाओं को किसी प्रकार की कोई दिक्कत पेश न आए। देखा जाएगा कि क्या जेलों में उनको कोई परेशानी तो नहीं।
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यह जानने की कोशिश की जाएगी कि किन हालातों में वे हवालात पहुंचीं। यदि आयोग को लगा कि कोई महिला कैदी निर्दोष है और उसको रिहा कराना चाहिए, तो उसके लिए लड़ाई भी लड़ी जाएगी। आयोग महिलाओं को काउंसिलिंग देगा।
इसमें महिलाओं को दोबारा ऐसी घटनाओं से बचने की नसीहत दी जाएगी, ताकि वेे दोबारा हवालात न पहुंचें। महिला कैदियों को यह भी बताया जाएगा कि वे अन्य महिलाओं को भी जागरूक करें। आयोग का मानना है कि महिलाएं जानबूझ कर अपराध नहीं करतीं। उनको हालात अपराधी बना देते हैं। इसलिए ऐसे हालातों का सामना करने के लिए आयोग महिला कैदियों में जान फूंकेगा।
तारीख पे तारीख
जेलों में बंद महिला कैदियों को तारीख पे तारीख मिलती है। कई महिला कैदियों के कई साल तक चालान नहीं पेश किए जाते। इसकी वजह से उनको लंबे समय तक जेलों में अपनी जिंदगी काटनी पड़ती है। इस पर भी आयोग कड़ा संज्ञान लेगा।
अध्यक्ष शमीमा फिरदोस का कहना है कि वह गृह और पुलिस विभाग से अपील करेगा कि महिला कैदियों के चालान पेश होने में देरी न हो। उनके चालान तुरंत पेश हों, ताकि उनको सजा की अवधि लंबी न काटनी पड़े।