सीजफायर पर गृहमंत्री ने दिया ये कड़ा जवाब
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पाकिस्तान के ओर से एलओसी और इंटरनेशनल बार्डर पर की जा रही फायरिंग में पांच लोगों की हत्या पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़े शब्दों में निंदा की है। गृह मंत्री ने कहा, 'मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि पाकिस्तान को सीजफायर का उल्लंघन करना बंद करना होगा।'
इससे पहले कल राजनाथ सिंह ने हरियाणा में एक रैली को संबोधित करत् हुए कहा था कि सीजफायर तोड़ने पर पाक को सफेद झंडा नहीं दिखाएंगे, बल्कि गोलियों से मुंह तोड़ जवाब देंगे। बार-बार सफेद झंडे दिखाना पिछली सरकार की आदत थी, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। सिंह ने कहा कि उल्लंघन के बाद मीटिंग, सिटिंग और ईटिंग का दौर अब खत्म हो चुका है, अब हम मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं।
वहीं जब पत्रकारों ने पाक की ओर से लगातार हो रही फायरिंग पर कुछ और सवाल पूछे तो राजनाथ सिंह ने कहा कि 'पाकिस्तान को सीजफायर का उल्लंघन बंद करना होगा। उसे समझना होगा कि अब भारत में जमाना बदल चुका है।'
1 अक्टूबर से जम्मू एवं कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की यह 11वीं घटना है। पाकिस्तान ने पिट्टल, चेनाज और नारायणपुर समेत 15 भारतीय पोस्ट को भी निशाना बनाया।
बातचीत और फ्लैग मीटिंग नहीं, अब जवाबी कार्रवाई का वक्त
पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा ग्रामीण इलाकों को निशाना बनाए जाने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। किसानों के अनुसार अब उन्हें खेतों की ओर जाने से डर लगता है।
जिले के सीमावर्ती नंगा, कदराल, जस्सो चक, अवताल, जेरड़ा, दग, नथवाल आदि गांवों के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान ऐसे समय पर गोलाबारी करता है, जब या तो फसलों की बुआई हो रही होती है या इसकी कटाई का वक्त होता है। ऐसे में किसान किसी तरह फसल को पकने की स्थिति तक पहुंचा भी लेते हैं तो उसकी कटाई पर बंदूकों का साया रहता है।
किसान पृथ्वी सिंह, सूरत सिंह, बलवान सिंह, राज कुमार आदि ने बताया कि उनके गांव चचवाल, चलेआरी और मंगू चक सीमा से सटे हुए हैं। खेत तारबंदी के पास हैं। खेतों में फसल खड़ी है। उन्हें वहां जाने से डर लगता है। पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कि वह कब गोले दाग दे।
सीमावर्ती ग्रामीण पूर्व कैप्टन दर्शन चौधरी, अशोक चौधरी समेत नरेंद्र सिंह, प्रेमपाल आदि ने कहा कि इसी साल जुलाई और अगस्त में पाकिस्तान ने गोलाबारी की थी, तब धान की रोपाई का काम चल रहा था।
उस समय रोपाई में भी खलल पड़ा। अब बचीखुची फसल काटने को है तो उस पर भी संकट के बादल हैं। कई ग्रामीणों ने पाकिस्तानी गोलाबारी के चलते धान की रोपाई ही नहीं की थी। ग्रामीणों का कहना है कि अब पाकिस्तान से बातचीत और फ्लैग मीटिंग का वक्त नहीं है। अब वक्त जवाबी कार्रवाई का है। ग्रामीणों ने लंबे समय से अपना नुकसान उठाया है। यह कब तक बर्दाश्त किया जाएगा।