{"_id":"68cf1970cd06b9889e094ba8","slug":"srinagar-news-illigal-minning-news-srinagar-news-c-10-lko1021-718321-2025-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: विशु नाले में खनन से खतरा, मत्स्य पालन विभाग ने मांगी सख्त निगरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: विशु नाले में खनन से खतरा, मत्स्य पालन विभाग ने मांगी सख्त निगरानी
Sun, 21 Sep 2025 02:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 21 Sep 2025 02:45 AM IST
विज्ञापन
श्रीनगर। मत्स्य पालन विभाग ने स्वीकार किया है कि कुलगाम जिले को प्रतिदिन छह मिलियन गैलन से अधिक पेयजल उपलब्ध कराने वाली झेलम की सहायक नदी विशु अवैज्ञानिक और अनियंत्रित खनन से गंभीर संकट में है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर हलफनामे में विभाग ने कहा कि अत्यधिक खनन और प्रदूषण ने नदी की जलीय जैव विविधता, विशेषकर ट्राउट और स्चिज़ोथोरैक्स प्रजाति, को खतरे में डाल दिया है। ट्राउट के लिए अक्टूबर-दिसंबर और स्चिजोथोरैक्स के लिए अप्रैल-जून के दौरान खनन गतिविधियों से पानी की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ा है।
विभाग ने बताया कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है। प्राकृतिक वास नष्ट हुए हैं और मछली उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने भूविज्ञान और खनन विभाग की कमजोर निगरानी को पारिस्थितिक क्षति का मुख्य कारण बताया। मत्स्य पालन विभाग ने ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रतिबद्धता दोहराई कि वह पर्यावरण संरक्षण और जलीय जैव विविधता की रक्षा के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। साथ ही जिला प्रशासन से सख्त रोकथाम उपाय लागू करने की अपील की।
विज्ञापन
विभाग के सुझाव
खनन गतिविधियों का पुनर्मूल्यांकन और केवल चिन्हित शुष्क क्षेत्रों तक सीमित करना।
जलीय जीवों वाले क्षेत्रों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध।
प्रदूषण नियंत्रण समिति के सहयोग से कृषि अपशिष्ट और कचरे का प्रवाह रोकने के उपाय।
स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी देकर अवैध खनन और कचरा निपटान पर निगरानी।
आवास पुनर्वास परियोजनाएं और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी।
पानी की गुणवत्ता और मछली आबादी का नियमित मूल्यांकन।
विज्ञापन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर हलफनामे में विभाग ने कहा कि अत्यधिक खनन और प्रदूषण ने नदी की जलीय जैव विविधता, विशेषकर ट्राउट और स्चिज़ोथोरैक्स प्रजाति, को खतरे में डाल दिया है। ट्राउट के लिए अक्टूबर-दिसंबर और स्चिजोथोरैक्स के लिए अप्रैल-जून के दौरान खनन गतिविधियों से पानी की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ा है।
विज्ञापन
विभाग ने बताया कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है। प्राकृतिक वास नष्ट हुए हैं और मछली उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने भूविज्ञान और खनन विभाग की कमजोर निगरानी को पारिस्थितिक क्षति का मुख्य कारण बताया। मत्स्य पालन विभाग ने ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रतिबद्धता दोहराई कि वह पर्यावरण संरक्षण और जलीय जैव विविधता की रक्षा के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। साथ ही जिला प्रशासन से सख्त रोकथाम उपाय लागू करने की अपील की।
विज्ञापन
विभाग के सुझाव
खनन गतिविधियों का पुनर्मूल्यांकन और केवल चिन्हित शुष्क क्षेत्रों तक सीमित करना।
जलीय जीवों वाले क्षेत्रों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध।
प्रदूषण नियंत्रण समिति के सहयोग से कृषि अपशिष्ट और कचरे का प्रवाह रोकने के उपाय।
स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी देकर अवैध खनन और कचरा निपटान पर निगरानी।
आवास पुनर्वास परियोजनाएं और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी।
पानी की गुणवत्ता और मछली आबादी का नियमित मूल्यांकन।