जम्मू-कश्मीर में मौसम का हाहाकार, 20 हजार फंसे
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बेमौसम हुए मौसम के उत्पात ने पूरी रियासत में कहर बरपा रखा है। होली के त्योहार पर भी हजारों लोग रास्ते बंद होने के कारण घर न पहुंचकर रास्ते में अटके हैं। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे समेत तमाम मार्ग बारिश, हिमपात और भूस्खलन के कारण बंद हैं।
अगले 24 घंटों के लिए सभी जिलों को भूस्खलन के खतरे से हाई अलर्ट पर रखा गया है। मां वैष्णो देवी के लिए हेलीकाप्टर सेवा बंद है। करीब 20 हजार लोग विभिन्न स्थानों पर फंसे होने के कारण घर नहीं पहुंच पा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर दर्जनों घर जमींदोज हो चुके हैं। कच्चे और जर्जर मकानों के लिए खतरा बढ़ता ही जा रहा है।
सेना राहत कार्यों में जुट गई है। रामसू के पास गामा गांव में खिसकते पहाड़ों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से 24 डोजर लगाए गए हैं। इसमें बीआरओ, सेना, रेलवे और अन्य विभागों की मदद ली गई है। किश्तवाड़ जिले में बर्फ में फंसे 220 लोगों को वायुसेना ने चॉपर से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
कारगिल में पारा शून्य से 8.4 डिग्री नीचे लुढ़क गया
कश्मीर और लद्दाख में कड़ाके की ठंड है। कारगिल में पारा शून्य से 8.4 डिग्री नीचे लुढ़क गया है। पुंछ में मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी है। पुंछ की हवेली तहसील के बगयाल दरा गांव में बाढ़ और भारी भूस्खलन का खतरा उत्पन्न हो गया है।
यहां एक पहाड़ी नीचे खिसक रही है। 40 से ज्यादा परिवारों को सुरक्षित स्थानों पहुंचाया गया है। प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। मंडी तहसील के गांव छेला डांगरी में भी कुछ स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सेना से भी संपर्क साधा है।
राजोरी स्थित सेना की 25 इंफेंट्री डिवीजन के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि सेना पूरी तरह तैयार है। कहीं बर्फबारी तो कहीं चट्टाने खिसकने से कश्मीर घाटी चौथे दिन भी देश-दुनिया से सड़क मार्ग से कटी रही।