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Jammu News: कश्मीर में हॉकी की पौध को सींच रहे वरिष्ठ खिलाड़ी
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श्रीनगर के पोलो ग्राउंड में एस्ट्रो टर्फ पर प्रेक्टिस करते बच्चे। अमर उजाला
- पोलो ग्राउंड में 200 से अधिक बच्चों को सिखा रहे हॉकी की बारीकियां
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। कश्मीर जहां फुटबॉल और क्रिकेट का युवाओं में काफी जुनून है, वहीं हॉकी के वरिष्ठ और पूर्व खिलाड़ी हॉकी खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने में लगे हैं। युवा खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए हाल ही में कुछ प्रतियोगिताएं भी कराई गई हैं।
श्रीनगर के पोलो ग्राउंड में हर रविवार को सुबह से हॉकी की क्लास लगती हैं। श्रीनगर ही नहीं आसपास के बच्चे भी यहां हॉकी सीखने आते हैं। बच्चों के लिए यह निशुल्क क्लास श्रीनगर के वरिष्ठ और पूर्व हॉकी खिलाड़ी चलाते हैं। वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी सतनाम सिंह ने बताया कि करीब दो साल से वह अपने साथियों के साथ यहां बच्चों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। हाल ही में तीन बड़ी प्रतियोगिताएं भी यहां कराई गई हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर के साथ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की टीमों ने हिस्सा लिया था। हमारा उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट और फुटबॉल की तरह ही हॉकी को उत्साह बढ़ाना है।
वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनकी दो साल की मेहनत का ही नतीजा है कि इस समय करीब 200 बच्चे यहां हॉकी सीखने आ रहे हैं। रविवार को बैच बनाकर बच्चों को हॉकी सिखाते हैं। इन्हीं में से कुछ खिलाड़ी अब प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले रहे हैं। अभी दो महीने पहले हुई प्रतियोगिता में भी बच्चों ने हिस्सा लिया था।
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हॉकी कोच कुलदीप सिंह ने बताया कि हमारा मकसद कश्मीर में हॉकी को आगे ले जाने का है। बच्चों को फ्री में हॉकी सिखाते हैं। समय-समय पर बच्चों को हॉकी किट और अन्य सामान भी दिया जाता है। इनमें कई बार अन्य संस्थाएं भी हमारी मदद करती हैं। हाल ही में एक स्कूल ने बारामुला के बच्चों को 24 हॉकी स्टिक और श्रीनगर के 150 बच्चों को किट दी थी।
बड़ा खिलाड़ी बनने का है जुनून
महज आठ साल की नीतिका यहां अपनी मम्मी के साथ हर रविवार को आती हैं। पूछने पर बड़ी मासूमियत से बताती हैं कि उनके भाई यहां हॉकी सीखने आते हैं तो वह भी मम्मी के साथ आने लगीं। मैं भी भाई की तरह ही हॉकी खेलना चाहती हूं। वहीं 12 साल के रोहनप्रीत पिछले दो साल से हॉकी की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बादल हॉकी क्लब की ओर से श्रीनगर की टीम में मैच भी खेल चुके हैं। रोहनप्रीत ने बताया कि हाॅकी ही अब उनका जुनून है। हालिया मैच में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। वह मेहनत कर रहे हैं। सपना है एक दिन भारतीय टीम में खेल सकें। 10 साल की बाजिला ने हाल ही में हॉकी सीखना शुरू किया है। उन्होंने बताया कि कोच सर की मोटिवेशन के बाद उन्होंने इसकी ट्रेनिंग शुरू की है।
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अजीम यूसुफ
श्रीनगर। कश्मीर जहां फुटबॉल और क्रिकेट का युवाओं में काफी जुनून है, वहीं हॉकी के वरिष्ठ और पूर्व खिलाड़ी हॉकी खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने में लगे हैं। युवा खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए हाल ही में कुछ प्रतियोगिताएं भी कराई गई हैं।
श्रीनगर के पोलो ग्राउंड में हर रविवार को सुबह से हॉकी की क्लास लगती हैं। श्रीनगर ही नहीं आसपास के बच्चे भी यहां हॉकी सीखने आते हैं। बच्चों के लिए यह निशुल्क क्लास श्रीनगर के वरिष्ठ और पूर्व हॉकी खिलाड़ी चलाते हैं। वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी सतनाम सिंह ने बताया कि करीब दो साल से वह अपने साथियों के साथ यहां बच्चों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। हाल ही में तीन बड़ी प्रतियोगिताएं भी यहां कराई गई हैं जिसमें जम्मू-कश्मीर के साथ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की टीमों ने हिस्सा लिया था। हमारा उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट और फुटबॉल की तरह ही हॉकी को उत्साह बढ़ाना है।
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वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनकी दो साल की मेहनत का ही नतीजा है कि इस समय करीब 200 बच्चे यहां हॉकी सीखने आ रहे हैं। रविवार को बैच बनाकर बच्चों को हॉकी सिखाते हैं। इन्हीं में से कुछ खिलाड़ी अब प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले रहे हैं। अभी दो महीने पहले हुई प्रतियोगिता में भी बच्चों ने हिस्सा लिया था।
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हॉकी कोच कुलदीप सिंह ने बताया कि हमारा मकसद कश्मीर में हॉकी को आगे ले जाने का है। बच्चों को फ्री में हॉकी सिखाते हैं। समय-समय पर बच्चों को हॉकी किट और अन्य सामान भी दिया जाता है। इनमें कई बार अन्य संस्थाएं भी हमारी मदद करती हैं। हाल ही में एक स्कूल ने बारामुला के बच्चों को 24 हॉकी स्टिक और श्रीनगर के 150 बच्चों को किट दी थी।
बड़ा खिलाड़ी बनने का है जुनून
महज आठ साल की नीतिका यहां अपनी मम्मी के साथ हर रविवार को आती हैं। पूछने पर बड़ी मासूमियत से बताती हैं कि उनके भाई यहां हॉकी सीखने आते हैं तो वह भी मम्मी के साथ आने लगीं। मैं भी भाई की तरह ही हॉकी खेलना चाहती हूं। वहीं 12 साल के रोहनप्रीत पिछले दो साल से हॉकी की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बादल हॉकी क्लब की ओर से श्रीनगर की टीम में मैच भी खेल चुके हैं। रोहनप्रीत ने बताया कि हाॅकी ही अब उनका जुनून है। हालिया मैच में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। वह मेहनत कर रहे हैं। सपना है एक दिन भारतीय टीम में खेल सकें। 10 साल की बाजिला ने हाल ही में हॉकी सीखना शुरू किया है। उन्होंने बताया कि कोच सर की मोटिवेशन के बाद उन्होंने इसकी ट्रेनिंग शुरू की है।