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'मुझे खुले आसमान में उड़ने की जिद थी'

Sun, 25 Jan 2015 12:39 PM IST
Updated Sun, 25 Jan 2015 12:39 PM IST
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special interview of flying officer razia thakur, udhampur

बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए ऊंची उड़ान भरने से नहीं हिचकना चाहिए। आज उनके सामने खुला आसमान है, बस जरूरत है दृढ़ इच्छाशक्ति की। भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से महज सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित गढ़ गांव की रजिया ठाकुर ने इसे सच साबित कर दिखाया है।

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रजिया लड़कों और लड़कियों में बराबरी की पक्षधर हैं। दिसंबर 2014 में एक गांव से निकलकर फ्लाइंग अफसर बनने तक का सफर पूरा करने वाली रजिया देश सेवा के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हैं।
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हीरानगर सब डिवीजन से पहली महिला फ्लाइंग आफिसर बनने वाली रजिया ग्रेजुशन की पढ़ाई के दौरान प्रशासनिक सेवा को लक्ष्य बनाकर तैयारी कर रही थीं, लेकिन प्रदेश स्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और रजत पदक जीतने से उनको कुछ अलग प्रेरणा मिली। शूटिंग प्रतियोगिता ने उनको नया लक्ष्य दिया।
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वह लक्ष्य था सैन्य बल में अफसर बनकर देश सेवा करना। जब उन्होंने लक्ष्य को पाने के लिए कोशिशें शुरू कीं, तो परिवार के सदस्यों ने पूरा साथ दिया। प्रशिक्षण अकादमी से मिली तकनीकी सहायता की बदौलत रजिया को लक्ष्य तक पहुंचने का हौसला मिला।

रिजेक्ट होने पर भी नहीं मानी हार

special interview of flying officer razia thakur, udhampur

सफलता का कोई शार्टकट नहीं
रजिया बताती हैं कि सफलता का सबसे बड़ा सूत्र सही दिशा में कड़ी मेहनत से प्रयास करना है। रजिया के अनुसार सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। इसलिए यदि लक्ष्य को पाना है, तो पूरी तैयारी से उस दिशा में प्रयास करना चाहिए। पूरे मनोयोग से किया गया प्रयास अवश्य ही लक्ष्य तक ले जाएगा।

एक बार मेडिकल में रिजेक्ट होने पर भी नहीं मानी हार
फ्लाइंग अफसर के लिए चयन होने के बाद रजिया को मेडिकल में अस्थाई रूप से रिजेक्ट कर दिया गया। कुछ ही दिनों के भीतर उनको अपना वजन कम करने को कहा गया। बस फिर क्या था रजिया वजन करने में जी जान से जुट गईं। आखिरकार वे मेडिकल परीक्षा को भी उत्तीर्ण करने में कामयाब हो गईं।

असंभव कुछ भी नहीं
रजिया ठाकुर ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वे अब एक काबिल फ्लाइंग अफसर बनना चाहती हैं। इसके लिए वे अपने स्तर से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। रजिया के मुताबिक यदि उनकी तरह हर परिवार बेटियों का साथ दे, सपनों को पूरा करने के लिए हौसला दे, तो उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं।

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