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Jammu News: श्रीमद् देवी भागवत कथा के श्रवण से अकाल मृत्यु पर भी मिली मुक्ति
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चिनाब दरिया के जिया पोता घाट पर हुआ कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। जिया पोता घाट पर नवरात्र के अवसर पर श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजित किया गया है। सोमवार को कथावाचक हृदयानंद गिरि महाराज ने कहा कि दरिया चिनाब के किनारे श्रीमद् देवी भागवत कथा पहली बार आयोजित की गई है। अगर किसी की अकाल मृत्यु हुई हो, इस श्रीमद् देवी भागवत कथा का श्रवण करने से उसकी मुक्ति हो जाती है।
उन्होंने कहा कि अखनूर के लोगों का भक्ति प्रेम देखकर हम प्रभावित हैं कि बारिश के बावजूद श्रद्धालु श्रीमद् देवी भागवत कथा सुनने पहुंचे। श्री रामचरितमानस पर कुछ लोगों द्वारा टिप्पणी करने पर कथावाचक ने कहा कि रामचरितमानस एक आदर्श है, जिसमें पिता-पुत्र, पति-पत्नी, भाई-भाई का प्रेम व जात पात पर विश्वास न रखते हुए भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने कहा कि अपने देश की आन, बान और शान के लिए एकजुट रहना चाहिए, क्योंकि भारत एक महान देश है, और जल्द ही भारत विश्व गुरु के नाम से जाना जाएगा। सनातन धर्म को श्रेष्ठ धर्म बताते हुए स्वामी हृदयानंद गिरि ने कहा कि सनातन धर्म मूल है, जिसमें अनेक शाखाएं निकलीं। मौके पर दुर्गा मंदिर के महंत प्रमेश्वर दास उपस्थित थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। जिया पोता घाट पर नवरात्र के अवसर पर श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजित किया गया है। सोमवार को कथावाचक हृदयानंद गिरि महाराज ने कहा कि दरिया चिनाब के किनारे श्रीमद् देवी भागवत कथा पहली बार आयोजित की गई है। अगर किसी की अकाल मृत्यु हुई हो, इस श्रीमद् देवी भागवत कथा का श्रवण करने से उसकी मुक्ति हो जाती है।
उन्होंने कहा कि अखनूर के लोगों का भक्ति प्रेम देखकर हम प्रभावित हैं कि बारिश के बावजूद श्रद्धालु श्रीमद् देवी भागवत कथा सुनने पहुंचे। श्री रामचरितमानस पर कुछ लोगों द्वारा टिप्पणी करने पर कथावाचक ने कहा कि रामचरितमानस एक आदर्श है, जिसमें पिता-पुत्र, पति-पत्नी, भाई-भाई का प्रेम व जात पात पर विश्वास न रखते हुए भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने कहा कि अपने देश की आन, बान और शान के लिए एकजुट रहना चाहिए, क्योंकि भारत एक महान देश है, और जल्द ही भारत विश्व गुरु के नाम से जाना जाएगा। सनातन धर्म को श्रेष्ठ धर्म बताते हुए स्वामी हृदयानंद गिरि ने कहा कि सनातन धर्म मूल है, जिसमें अनेक शाखाएं निकलीं। मौके पर दुर्गा मंदिर के महंत प्रमेश्वर दास उपस्थित थे।
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